Wednesday, October 8, 2014

यूपी के राज्य सूचना आयोग के खिलाफ लामबंद हुए सामाजिक संगठन देंगे धरना : यूपी के सूचना आयुक्तों पर अक्षमता का आरोप लगाते आरटीआई संगठनों ने दी एक्ट पर खुली बहस की चुनौती : सामाजिक कार्यकर्ता, आरटीआई विशेषज्ञ और 'तहरीर' के संस्थापक और अध्यक्ष ई० संजय शर्मा ने दी है वर्तमान कार्यरत नौ सूचना आयुक्तों से एक साथ अकेले खुली वहस करने की चुनौती

यूपी के राज्य सूचना आयोग के खिलाफ लामबंद हुए सामाजिक संगठन देंगे
धरना : यूपी के सूचना आयुक्तों पर अक्षमता का आरोप लगाते आरटीआई संगठनों
ने दी एक्ट पर खुली बहस की चुनौती : सामाजिक कार्यकर्ता, आरटीआई विशेषज्ञ
और 'तहरीर' के संस्थापक और अध्यक्ष ई० संजय शर्मा ने दी है वर्तमान
कार्यरत नौ सूचना आयुक्तों से एक साथ अकेले खुली वहस करने की चुनौती


उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में
प्रदेश के बिभिन्न सामाजिक संगठनों ने 'तहरीर' नामक संस्था के साथ
इकट्ठे होकर राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान धरना स्थल पर 12 अक्टूबर
2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक धरना-प्रदर्शन करने का
निर्णय लिया है l इस कार्यक्रम में येश्वर्याज सेवा संस्थान, एक्शन ग्रुप
फॉर राइट टु इनफार्मेशन , आरटीआई कॉउंसिल ऑफ़ यूपी , ट्रैप संस्था अलीगढ ,
सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन, मानव विकास सेवा समिति मुरादाबाद
, जन सूचना अधिकार जागरूकता मंच,भ्रष्टाचार हटाओ देश बचाओ मंच , एसआरपीडी
मेमोरियल समाज सेवा संस्थान , आल इण्डिया शैडयूल्ड कास्ट्स एंड शैडयूल्ड
ट्राइब्स एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन, भागीदारी मंच आदि संगठन शिरकत कर
रहे है l


इस बारे में बात करते हुए तहरीर के संस्थापक संजय ने बताया " 'तहरीर'
उत्तर प्रदेश स्थित सामाजिक संगठन है जो लोक जीवन में पारदर्शिता
संवर्धन, जबाबदेही निर्धारण और आमजन के मानवाधिकारों के संरक्षण के
हितार्थ उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर कार्यशील है l 'तहरीर' की कार्य
प्रणाली अन्य सामाजिक संगठनों से कुछ भिन्न है l 'तहरीर' का सूत्रवाक्य
"अपनी शक्ति आप" है और 'तहरीर' अपने सदस्यों की समस्याओं का हल करने को
उन सदस्यों को अन्य सामाजिक संगठनों की भाँति अपने पीछे-पीछे दौड़ाकर बार
बार अपने अग्रजनों की श्रेष्ठता दिखाने के बजाये सभी नागरिकों की
आत्मनिर्भरता के सिद्धांत पर कार्य करता है और हमारी कोर टीम अपने
सदस्यों को समुचित रूप से प्रशिक्षित कर उनको उनकी लड़ाई स्वयं ही लड़ने के
लिए तैयार करती है और उनको परदे के पीछे रहकर अप्रत्यक्ष सहायता प्रदान
करते हुए विजयश्री दिलाती है lआने बाले 12 अक्टूबर को पारदर्शिता संवर्धन
के सबसे प्रभावी औजार आरटीआई एक्ट को लागू हुए 9 वर्ष पूरे हो रहे हैं l
बीते सप्ताह 'तहरीर' की पारदर्शिता विंग की सभा में यह निर्णय लिया गया
था कि उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में
सामाजिक संगठन 'तहरीर' के बैनर तले राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान
धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक
धरना-प्रदर्शन किया जाये lउत्तर प्रदेश में पारदर्शिता कानून के
क्रियान्वयन की दुर्दशा के सम्बन्ध में 'तहरीर' संगठन ने हाल ही में
सूबे के राज्यपाल को एक ज्ञापन प्रेषित किया था l"


संजय ने बताया कि आरटीआई एक्ट में सूचना आयोग की भूमिका एक्ट के संरक्षक
की है परन्तु दुर्भाग्य है कि उत्तर प्रदेश सूचना आयोग आरटीआई एक्ट के
संरक्षक के स्थान पर एक्ट के प्राविधानों के क्रियान्वयन के मार्ग के
विनाशक के रूप में सामने आ रहा है lनौ सूचना आयुक्त नियुक्त होने के
बाबजूद 55000 से अधिक वादों का लम्वित होना आयोग में व्याप्त
दुर्व्यवस्थाओं का हाल स्वयं ही वयाँ कर रहा है lनौ सालों में आयोग की
नियमावली तक नहीं लागू हो पाई है l आयोग में लंबित वादों की सुनवाई , नयी
अपीलों और शिकायतों पंजीकरण और सुनवाई, आदेशों की नक़ल देने आदि की कोई
स्पष्ट एवं स्थापित व्यवस्था नहीं है lअभी तक के कार्यकाल में वर्तमान
सूचना आयुक्त अधिनियम के वाध्यकारी प्राविधानों को समझने और क्रियान्वित
कराने में पूर्णतया असफल रहे हैं और सभी आयुक्तों द्वारा वादों की सुनवाई
मनमाने ढंग से और अपनी व्यक्तिगत सनक के आधार पर की जा रही है l



संजय का दावा है कि उत्तर प्रदेश सूचना आयोग का एक भी आदेश विधिक
मापदंडों के अनुसार की गयी जांच में पास नहीं हो पायेगा lसूचना आयुक्त न
तो अधिनियम और कानून जानते हैं और न ही बताने पर जानने का प्रयास करते
हैं l अधिकांश सूचना आयुक्त अधिनियम के तहत प्राप्त शिकायतों का संज्ञान
नहीं ले रहे हैं और इन शिकायतों को सरसरी तौर पर खारिज करने का
असंवैधानिक कार्य कर रहे हैं l संजय ने व्यक्तिगत रूप से अकेले ही एक
साथ सभी आयुक्तों को अधिनियम के प्राविधानों पर इन-कैमरा बहस हेतु खुली
चुनौती दी है जिसका सभी सामाजिक संगठनों ने समर्थन किया है l गौरतलब है
कि संजय शर्मा की गिनती देश के मूर्धन्य आरटीआई विशेषज्ञों में होती है
और उत्तर प्रदेश में आरटीआई के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता का लोहा
प्रदेश के सभी आरटीआई कार्यकर्ता मानते हैं l


संजय कहते हैं कि सूचना आयोग में बदहाली का आलम ये है कि बिना रिश्वत दिए
आयोग के आदेशों की नक़ल भी नहीं मिलती है l 30 दिन में सूचना देने के लिए
बने एक्ट के तहत आयोग में अपील करने पर 6 माह से 1 साल में सुनवाई का
नंबर आता है और अगली तारीखें भी 30 दिन से 6 माह तक की दी जा रही हैं
lसूचना आयुक्त नागरिकों और आरटीआई कार्यकर्ताओं से मिलने के कतई इच्छुक
नहीं हैं और आरटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा जनहित के लिए माँगी गयी सूचनाओं
पर दायर अपीलों की सुनवाइयों से पीछा छुड़ाने के लिए कार्यकर्ताओं को
सुनवाई में बेइज़्ज़त करने, उनके साथ बदसलूकी करने और यहाँ तक कि
कार्यकर्ताओं पर सरकारी कार्य में वाधा पंहुचाने की झूठी ऍफ़ आई आर लिखाने
जैसी पतित और तुच्छ हरकतें करने जैसी कारगुजारियां एक सोची समझी रणनीति
के तहत कर रहे हैं l कहना अनुचित न होगा की आयोग में सर्वत्र पूर्णतः
अराजकता व्याप्त है और सूचनार्थी यदि आयोग में है तो मानिए खतरे में है
lआयुक्तों द्वारा पारित आदेश लोकप्राधिकारियों की सुविधानुसार बदलने,
दण्डादेशों को असंवैधानिक रूप से बापस लेने जैसे कारनामों के चलते
'तहरीर' को यह कहने में गुरेज़ नहीं है कि 'विख्यात व्यक्ति' के रूप में
चयन के परदे के पीछे मनोनीत ये सूचना आयुक्त अब अपना असली 'कुख्यात
व्यक्ति' रूप प्रदेश को दिखा रहे हैं जिसका दुष्परिणाम पूरा प्रदेश भुगत
रहा है lसंजय ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पारदर्शिता कानून की हत्या
किये जाने की इन परिस्थितियों में पारदर्शिता सम्बर्धन के लिए बचनबद्ध
संगठन 'तहरीर' मूकदर्शक बना नहीं रह सकता था और इसीलिये सामाजिक संगठन
'तहरीर' ने आने बाले 12 अक्टूबर को पारदर्शिता संवर्धन के सबसे प्रभावी
औजार आरटीआई एक्ट के नौवें जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के
निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में अपने बैनर तले राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण
मेला मैदान धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह
03 बजे तक धरना-प्रदर्शन का आयोजन करने का निर्णय लिया था l


मेरा संगठन येश्वर्याज 12 अक्टूबर 2014 को धरना स्थल पर ही आरटीआई पर एक
जनसुनवाई और कैंप का आयोजन करने का निर्णय पूर्व में ही ले चुका था l
संजय की अपील पर मैंने उत्तर प्रदेश में पारदर्शिता संवर्धन के लिए
कार्यरत अन्य प्रमुख सामाजिक संगठन से भी इस संक्रमणकाल में चुप नहीं
बैठने और 12 अक्टूबर 2014 को होने बाले धरना-प्रदर्शन में अपने बैनर के
साथ प्रतिभाग कर पारदर्शिता के प्रति अपनी वचनबद्धता सिद्ध करने के संजय
के प्रयास को मजबूती देने की अपील की थी जिसे मानकर ये संगठन अब इस धरने
में सामूहिक रूप से प्रतिभाग कर रहे हैं l



कार्यक्रम में कामनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव नई दिल्ली की ओर से
येश्वर्याज को निःशुल्क उपलब्ध कराई गयी आरटीआई गाइड का भी निःशुल्क
वितरण किया जायेगा l


--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption 9455553838


http://upcpri.blogspot.in/


Note : if you don't want to receive mails from me,kindly inform me so
that i should delete your name from my mailing list.

आरटीआई एक्ट के 9वें जन्मदिन पर सूचना आयोग के खिलाफ सामाजिक संगठन करेंगे प्रदर्शन

http://ipnlive.in/view_full_news.php?news_id=3878

आरटीआई एक्ट के 9वें जन्मदिन पर सूचना आयोग के खिलाफ सामाजिक संगठन करेंगे प्रदर्शन

Posted on: Oct 08, 2014 on 06:50:50 PM (IST)

लखनऊ(आईपीएन)। उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन
के विरोध में प्रदेश के बिभिन्न सामाजिक संगठनों ने आरटीआई एक्ट के नौवें
जन्मदिन पर 'तहरीर' नामक संस्था के साथ इकट्ठे होकर 12 अक्टूबर को
राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान स्थल पर धरना-प्रदर्शन करने का
निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम में येश्वर्याज सेवा संस्थान, एक्शन ग्रुप
फॉर राइट टु इनफार्मेशन, आरटीआई कॉउंसिल ऑफ यूपी, ट्रैप संस्था अलीगढ़,
सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन, मानव विकास सेवा समिति मुरादाबाद,
जन सूचना अधिकार जागरूकता मंच, भ्रष्टाचार हटाओ देश बचाओ मंच, एसआरपीडी
मेमोरियल समाज सेवा संस्थान, ऑल इण्डिया शैडयूल्ड कास्ट्स एंड शैडयूल्ड
ट्राइब्स एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन आदि संगठन शिरकत कर रहे हैं।


--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption 9455553838


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Sunday, October 5, 2014

e-Invite :उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में सामाजिक संगठन 'तहरीर' के बैनर तले राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक धरना-प्रदर्शन का आयोजन

From facebook wall of Sanjay Sharmaji

https://www.facebook.com/sanjay.sharma.tahrir/posts/1539370056279480:0

उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में
सामाजिक संगठन 'तहरीर' के बैनर तले राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान
धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक
धरना-प्रदर्शन का आयोजन

'तहरीर' उत्तर प्रदेश स्थित सामाजिक संगठन है जो लोक जीवन में पारदर्शिता
संवर्धन, जबाबदेही निर्धारण और आमजन के मानवाधिकारों के संरक्षण के
हितार्थ उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर कार्यशील है l 'तहरीर' की कार्य
प्रणाली अन्य सामाजिक संगठनों से कुछ भिन्न है l 'तहरीर' का सूत्रवाक्य
"अपनी शक्ति आप" है और 'तहरीर' अपने सदस्यों की समस्याओं का हल करने को
उन सदस्यों को अन्य सामाजिक संगठनों की भाँति अपने पीछे-पीछे दौड़ाकर बार
बार अपने अग्रजनों की श्रेष्ठता दिखाने के बजाये सभी नागरिकों की
आत्मनिर्भरता के सिद्धांत पर कार्य करता है और हमारी कोर टीम अपने
सदस्यों को समुचित रूप से प्रशिक्षित कर उनको उनकी लड़ाई स्वयं ही लड़ने के
लिए तैयार करती है और उनको परदे के पीछे रहकर अप्रत्यक्ष सहायता प्रदान
करते हुए विजयश्री दिलाती है l

आने बाले 12 अक्टूबर को पारदर्शिता संवर्धन के सबसे प्रभावी औजार आरटीआई
एक्ट को लागू हुए 9 वर्ष पूरे हो रहे हैं l आज 'तहरीर' पारदर्शिता विंग
की सभा में यह निर्णय लिया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के
निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में सामाजिक संगठन 'तहरीर' के बैनर तले
राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को
पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक धरना-प्रदर्शन किया जायेगा l

उत्तर प्रदेश में पारदर्शिता कानून के क्रियान्वयन की दुर्दशा के सम्बन्ध
में हमारे संगठन ने हाल ही में सूबे के राज्यपाल को एक ज्ञापन प्रेषित
किया था l आरटीआई एक्ट में सूचना आयोग की भूमिका एक्ट के संरक्षक की है
परन्तु दुर्भाग्य है कि उत्तर प्रदेश सूचना आयोग आरटीआई एक्ट के संरक्षक
के स्थान पर एक्ट के प्राविधानों के क्रियान्वयन के मार्ग के विनाशक के
रूप में सामने आ रहा है l

नौ सूचना आयुक्त नियुक्त होने के बाबजूद 55000 से अधिक वादों का लम्वित
होना आयोग में व्याप्त दुर्व्यवस्थाओं का हाल स्वयं ही वयाँ कर रहा है l

नौ सालों में आयोग की नियमावली तक नहीं लागू हो पाई है l आयोग में लंबित
वादों की सुनवाई , नयी अपीलों और शिकायतों पंजीकरण और सुनवाई, आदेशों की
नक़ल देने आदि की कोई स्पष्ट एवं स्थापित व्यवस्था नहीं है l

अभी तक के कार्यकाल में वर्तमान सूचना आयुक्त अधिनियम के वाध्यकारी
प्राविधानों को समझने और क्रियान्वित कराने में पूर्णतया असफल रहे हैं और
सभी आयुक्तों द्वारा वादों की सुनवाई मनमाने ढंग से और अपनी व्यक्तिगत
सनक के आधार पर की जा रही है l हमारा दावा है कि उत्तर प्रदेश सूचना आयोग
का एक भी आदेश विधिक मापदंडों के अनुसार की गयी जांच में पास नहीं हो
पायेगा l

सूचना आयुक्त न तो अधिनियम और कानून जानते हैं और न ही बताने पर जानने का
प्रयास करते हैं l अधिकांश सूचना आयुक्त अधिनियम के तहत प्राप्त शिकायतों
का संज्ञान नहीं ले रहे हैं और इन शिकायतों को सरसरी तौर पर खारिज करने
का असंवैधानिक कार्य कर रहे हैं l 'तहरीर' के एक सदस्य के रूप में मैं
व्यक्तिगत रूप से अकेला ही एक साथ सभी आयुक्तों को अधिनियम के
प्राविधानों पर इन-कैमरा बहस हेतु खुली चुनौती दे रहा हूँ l

सूचना आयोग में बदहाली का आलम ये है कि बिना रिश्वत दिए आयोग के आदेशों
की नक़ल भी नहीं मिलती है l 30 दिन में सूचना देने के लिए बने एक्ट के तहत
आयोग में अपील करने पर 6 माह से 1 साल में सुनवाई का नंबर आता है और अगली
तारीखें भी 30 दिन से 6 माह तक की दी जा रही हैं l

सूचना आयुक्त नागरिकों और आरटीआई कार्यकर्ताओं से मिलने के कतई इच्छुक
नहीं हैं और आरटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा जनहित के लिए माँगी गयी सूचनाओं
पर दायर अपीलों की सुनवाइयों से पीछा छुड़ाने के लिए कार्यकर्ताओं को
सुनवाई में बेइज़्ज़त करने, उनके साथ बदसलूकी करने और यहाँ तक कि
कार्यकर्ताओं पर सरकारी कार्य में वाधा पंहुचाने की झूठी ऍफ़ आई आर लिखाने
जैसी पतित और तुच्छ हरकतें करने जैसी कारगुजारियां एक सोची समझी रणनीति
के तहत कर रहे हैं l कहना अनुचित न होगा की आयोग में सर्वत्र पूर्णतः
अराजकता व्याप्त है और सूचनार्थी यदि आयोग में है तो मानिए खतरे में है l

आयुक्तों द्वारा पारित आदेश लोकप्राधिकारियों की सुविधानुसार बदलने,
दण्डादेशों को असंवैधानिक रूप से बापस लेने जैसे कारनामों के चलते
'तहरीर' को यह कहने में गुरेज़ नहीं है कि 'विख्यात व्यक्ति' के रूप में
चयन के परदे के पीछे मनोनीत ये सूचना आयुक्त अब अपना असली 'कुख्यात
व्यक्ति' रूप प्रदेश को दिखा रहे हैं जिसका दुष्परिणाम पूरा प्रदेश भुगत
रहा है l

उत्तर प्रदेश में पारदर्शिता कानून की हत्या किये जाने की इन
परिस्थितियों में पारदर्शिता सम्बर्धन के लिए बचनबद्ध संगठन 'तहरीर'
मूकदर्शक बना नहीं रह सकता है और इसीलिये सामाजिक संगठन 'तहरीर' आने बाले
12 अक्टूबर को पारदर्शिता संवर्धन के सबसे प्रभावी औजार आरटीआई एक्ट के
नौवें जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन
के विरोध में अपने बैनर तले राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान धरना
स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक
धरना-प्रदर्शन का आयोजन कर रहा है l

हमें विश्वास है कि उत्तर प्रदेश में पारदर्शिता संवर्धन के लिए कार्यरत
अन्य सभी सामाजिक संगठन भी इन तथ्यों से भली भाति परिचित होंगे एवं वे इस
संक्रमणकाल में चुप नहीं बैठेंगे और 12 अक्टूबर 2014 को होने बाले
धरना-प्रदर्शन में अपने बैनर के साथ प्रतिभाग कर पारदर्शिता के प्रति
अपनी वचनबद्धता सिद्ध करने के हमारे प्रयास को मजबूती अवश्य देंगे l

हमारी सभी सामाजिक संगठनों, नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील है
कि वे इस धरने में अपने अपने बैनर के साथ सम्मिलित होकर पारदर्शिता
सम्बर्धन के हमारे प्रयास को और मजबूती प्रदान करें l

यदि किसी व्यवहारिक समस्या के चलते आप लखनऊ आकर हमारा साथ देने में
असमर्थ हों तो आप अपने शहर में ही इस विषय पर धरने का आयोजन कर इसकी
सूचना हमें मोबाइल 8081898081 या ई मेल tahririndia@gmail.com पर दे दें
ताकि हम अपनी मुहिम में आपकी सहभागिता के लिए आपको धन्यवाद ज्ञापित कर
सकें l

e-Invite :उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में सामाजिक संगठन 'तहरीर' के बैनर तले राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक धरना-प्रदर्शन का आयोजन

From facebook wall of Sanjay Sharmaji

https://www.facebook.com/sanjay.sharma.tahrir/posts/1539370056279480:0

उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में
सामाजिक संगठन 'तहरीर' के बैनर तले राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान
धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक
धरना-प्रदर्शन का आयोजन

'तहरीर' उत्तर प्रदेश स्थित सामाजिक संगठन है जो लोक जीवन में पारदर्शिता
संवर्धन, जबाबदेही निर्धारण और आमजन के मानवाधिकारों के संरक्षण के
हितार्थ उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर कार्यशील है l 'तहरीर' की कार्य
प्रणाली अन्य सामाजिक संगठनों से कुछ भिन्न है l 'तहरीर' का सूत्रवाक्य
"अपनी शक्ति आप" है और 'तहरीर' अपने सदस्यों की समस्याओं का हल करने को
उन सदस्यों को अन्य सामाजिक संगठनों की भाँति अपने पीछे-पीछे दौड़ाकर बार
बार अपने अग्रजनों की श्रेष्ठता दिखाने के बजाये सभी नागरिकों की
आत्मनिर्भरता के सिद्धांत पर कार्य करता है और हमारी कोर टीम अपने
सदस्यों को समुचित रूप से प्रशिक्षित कर उनको उनकी लड़ाई स्वयं ही लड़ने के
लिए तैयार करती है और उनको परदे के पीछे रहकर अप्रत्यक्ष सहायता प्रदान
करते हुए विजयश्री दिलाती है l

आने बाले 12 अक्टूबर को पारदर्शिता संवर्धन के सबसे प्रभावी औजार आरटीआई
एक्ट को लागू हुए 9 वर्ष पूरे हो रहे हैं l आज 'तहरीर' पारदर्शिता विंग
की सभा में यह निर्णय लिया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के
निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में सामाजिक संगठन 'तहरीर' के बैनर तले
राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को
पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक धरना-प्रदर्शन किया जायेगा l

उत्तर प्रदेश में पारदर्शिता कानून के क्रियान्वयन की दुर्दशा के सम्बन्ध
में हमारे संगठन ने हाल ही में सूबे के राज्यपाल को एक ज्ञापन प्रेषित
किया था l आरटीआई एक्ट में सूचना आयोग की भूमिका एक्ट के संरक्षक की है
परन्तु दुर्भाग्य है कि उत्तर प्रदेश सूचना आयोग आरटीआई एक्ट के संरक्षक
के स्थान पर एक्ट के प्राविधानों के क्रियान्वयन के मार्ग के विनाशक के
रूप में सामने आ रहा है l

नौ सूचना आयुक्त नियुक्त होने के बाबजूद 55000 से अधिक वादों का लम्वित
होना आयोग में व्याप्त दुर्व्यवस्थाओं का हाल स्वयं ही वयाँ कर रहा है l

नौ सालों में आयोग की नियमावली तक नहीं लागू हो पाई है l आयोग में लंबित
वादों की सुनवाई , नयी अपीलों और शिकायतों पंजीकरण और सुनवाई, आदेशों की
नक़ल देने आदि की कोई स्पष्ट एवं स्थापित व्यवस्था नहीं है l

अभी तक के कार्यकाल में वर्तमान सूचना आयुक्त अधिनियम के वाध्यकारी
प्राविधानों को समझने और क्रियान्वित कराने में पूर्णतया असफल रहे हैं और
सभी आयुक्तों द्वारा वादों की सुनवाई मनमाने ढंग से और अपनी व्यक्तिगत
सनक के आधार पर की जा रही है l हमारा दावा है कि उत्तर प्रदेश सूचना आयोग
का एक भी आदेश विधिक मापदंडों के अनुसार की गयी जांच में पास नहीं हो
पायेगा l

सूचना आयुक्त न तो अधिनियम और कानून जानते हैं और न ही बताने पर जानने का
प्रयास करते हैं l अधिकांश सूचना आयुक्त अधिनियम के तहत प्राप्त शिकायतों
का संज्ञान नहीं ले रहे हैं और इन शिकायतों को सरसरी तौर पर खारिज करने
का असंवैधानिक कार्य कर रहे हैं l 'तहरीर' के एक सदस्य के रूप में मैं
व्यक्तिगत रूप से अकेला ही एक साथ सभी आयुक्तों को अधिनियम के
प्राविधानों पर इन-कैमरा बहस हेतु खुली चुनौती दे रहा हूँ l

सूचना आयोग में बदहाली का आलम ये है कि बिना रिश्वत दिए आयोग के आदेशों
की नक़ल भी नहीं मिलती है l 30 दिन में सूचना देने के लिए बने एक्ट के तहत
आयोग में अपील करने पर 6 माह से 1 साल में सुनवाई का नंबर आता है और अगली
तारीखें भी 30 दिन से 6 माह तक की दी जा रही हैं l

सूचना आयुक्त नागरिकों और आरटीआई कार्यकर्ताओं से मिलने के कतई इच्छुक
नहीं हैं और आरटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा जनहित के लिए माँगी गयी सूचनाओं
पर दायर अपीलों की सुनवाइयों से पीछा छुड़ाने के लिए कार्यकर्ताओं को
सुनवाई में बेइज़्ज़त करने, उनके साथ बदसलूकी करने और यहाँ तक कि
कार्यकर्ताओं पर सरकारी कार्य में वाधा पंहुचाने की झूठी ऍफ़ आई आर लिखाने
जैसी पतित और तुच्छ हरकतें करने जैसी कारगुजारियां एक सोची समझी रणनीति
के तहत कर रहे हैं l कहना अनुचित न होगा की आयोग में सर्वत्र पूर्णतः
अराजकता व्याप्त है और सूचनार्थी यदि आयोग में है तो मानिए खतरे में है l

आयुक्तों द्वारा पारित आदेश लोकप्राधिकारियों की सुविधानुसार बदलने,
दण्डादेशों को असंवैधानिक रूप से बापस लेने जैसे कारनामों के चलते
'तहरीर' को यह कहने में गुरेज़ नहीं है कि 'विख्यात व्यक्ति' के रूप में
चयन के परदे के पीछे मनोनीत ये सूचना आयुक्त अब अपना असली 'कुख्यात
व्यक्ति' रूप प्रदेश को दिखा रहे हैं जिसका दुष्परिणाम पूरा प्रदेश भुगत
रहा है l

उत्तर प्रदेश में पारदर्शिता कानून की हत्या किये जाने की इन
परिस्थितियों में पारदर्शिता सम्बर्धन के लिए बचनबद्ध संगठन 'तहरीर'
मूकदर्शक बना नहीं रह सकता है और इसीलिये सामाजिक संगठन 'तहरीर' आने बाले
12 अक्टूबर को पारदर्शिता संवर्धन के सबसे प्रभावी औजार आरटीआई एक्ट के
नौवें जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन
के विरोध में अपने बैनर तले राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान धरना
स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक
धरना-प्रदर्शन का आयोजन कर रहा है l

हमें विश्वास है कि उत्तर प्रदेश में पारदर्शिता संवर्धन के लिए कार्यरत
अन्य सभी सामाजिक संगठन भी इन तथ्यों से भली भाति परिचित होंगे एवं वे इस
संक्रमणकाल में चुप नहीं बैठेंगे और 12 अक्टूबर 2014 को होने बाले
धरना-प्रदर्शन में अपने बैनर के साथ प्रतिभाग कर पारदर्शिता के प्रति
अपनी वचनबद्धता सिद्ध करने के हमारे प्रयास को मजबूती अवश्य देंगे l

हमारी सभी सामाजिक संगठनों, नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील है
कि वे इस धरने में अपने अपने बैनर के साथ सम्मिलित होकर पारदर्शिता
सम्बर्धन के हमारे प्रयास को और मजबूती प्रदान करें l

यदि किसी व्यवहारिक समस्या के चलते आप लखनऊ आकर हमारा साथ देने में
असमर्थ हों तो आप अपने शहर में ही इस विषय पर धरने का आयोजन कर इसकी
सूचना हमें मोबाइल 8081898081 या ई मेल tahririndia@gmail.com पर दे दें
ताकि हम अपनी मुहिम में आपकी सहभागिता के लिए आपको धन्यवाद ज्ञापित कर
सकें l

--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption 9455553838


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Friday, October 3, 2014

फेंकी गई बच्चियों को गोद लेने नहीं आते

फेंकी गई बच्चियों को गोद लेने नहीं आते
http://inextlive.jagran.com/beti-bachao-campaign-41782

http://inextepaper.jagran.com/347580/INEXT-LUCKNOW/30.09.14#page/6/2
- बच्चियों को अपने आशियाने में बसाने के लिए लोगों में उत्साह ही नहीं
- पिछले सात सालों में 55 बेटियां लावारिस हालत में मिलीं
lucknow@inext.co.in
LUCKNOW: शहर-ए-तहजीब में लड़कियों के लिए कोई जगह नही है. कभी कोई एक
दिन की लड़की गली में फेंक देता है तो कभी नवजात शिशु को कूड़े के ढेर
में रख देता है. इस शहर का रिकॉर्ड देखें तो पिछले सात सालों में ख्8
बच्चे और भ्भ् बच्चियां हेल्पलाइन में लाई गई. लड़कों को गोद लेने के लिए
तो कई लोग आगे आए लेकिन बच्चियों को अपने आशियाने में बसाने के लिए लोगों
में उत्साह ही नहीं है. यही वजह है कि आज भी कई बच्चियां चिल्ड्रेन
हेल्पलाइन में हैं और इस आस में हैं कि उन्हें कोई सहारा मिल सके.
बेटियों को नहीं आते हैं गोद लेने
बेटियों को गोद लेने के लिए लोगों में ज्यादा रिस्पांस नहीं आता है. हैरत
की बात यह है कि पिछले सात सालों में भ्भ् बेटियों को लावारिस हालत में
यहां लाया गया. उनके लिए गोद लेने वाले भी कम हैं. वैसे भी गोद लेने की
प्रक्रिया इतनी कठिन है कि उसी में करीब दो साल लग जाते है.
बेटियां नाम कर रही हैं रोशन
सोशल एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने बताया कि लोगों में अजीबोगरीब सोच है.
वह बेटियों को कमतर आंकते हैं. लेकिन ऐसा नही है. आज बेटियां देश का नाम
रोशन कर रही हैं. न जाने क्यों कुछ लोग बेटियों के पैदा होने पर अपने को
शर्मसार महसूस करते हैं लेकिन ऐसा कतई नहीं है. बेटियां आज समाज को रोशन
करी हैं.
न्यू बॉर्न बेबी की लिस्ट
साल- मेल- फीमेल
ख्007- भ्- म्
ख्008- फ्- क्7
ख्009- 9- क्क्
ख्0क्0- भ्- क्क्
ख्0क्क्- क्- म्
ख्0क्ख्- भ्- फ्
ख्0क्फ्- ख्- क्ख्,
कोई बाधा मेरी उड़ान को नहीं रोक सकती.
हां, मैं वो हूं जो बदलाव ला सकती हूं, न तो छेड़छाड़ और न ही कोई अपराध
मुझे रोता हुआ छोड़ सकता है, मैं दुनिया का सामना करने के लिए हर चुनौती
लेने को तैयार हूं.. मुझे पूरी तरह से यकीन है कि मैं एक दिन दुनिया में
बदलाव ला सकूंगी.
मैं बेटी बचाओ अभियान की शुरुआत करने के लिए आई नेक्स्ट लाइव टीम का
तहेदिल से शुक्रिया अदा करती हूं. पूरी दुनिया में सभी बेटियों को मेरा
प्यार. मेरा मानना है कि अब समाज ऐसे पुराने विचारों से कहीं आगे बढ़
चुका है, जिसमें लड़कियों को गूंगा पशु के सामान समझा जाता था. आज की
महिलाओं ने लगभग हर फील्ड में अपना दबदबा बनाया है और महिलाओं ने यह
साबित किया है कि अगर संचालन करने का अवसर मिले तो वह पुरुषों से कहीं
अधिक बेहतर हैं. ऐसी कोई भी क्षेत्र नहीं बचा है, जहां महिलाओं ने अपने
एक्सीलेंस को साबित नहीं किया हो. आज यही महिलाएं और बेटियां हमारे देश
का गौरव हैं और विकास की धारा के साथ हैं.. तो देश के कल्याण के लिए मौका
क्यों छोड़ना.. 'अकेली चलूंगी.. किस्मत से मिलूंगी.. अरे मुझे क्या
बेचेगा रुपैय्या..' इसलिए हम सभी यह संकल्प लें कि हम हमेशा बेटियों की
सुरक्षा करेंगे, जो हमारा कल हैं और याद रहे 'जहां संघर्ष नहीं है, वहां
शक्ति नहीं है..'
- अनम अख्तर,
हेड गर्ल, सेंट जोसेफ इंटर कॉलेज, राजाजीपुरम
लोग लड़के के लिए प्रार्थना करते हैं, न कि लड़की के लिए.. वे हमेशा
लड़के की इच्छा रखते हैं, न कि लड़की की. वे लड़के का होना ज्यादा बेहतर
मानते हैं, न कि लड़की का. लेकिन जब हम संपत्ति की बात करते हैं तो वे
मां लक्ष्मी को पूजते हैं, जब वे शिक्षा की बात करते हैं तो मां सरस्वती
को पूजते हैं. अब मुझे बताइये.. वे क्यों संकोच करते हैं, जब उनके परिवार
में देवी स्वरूप बेटी जन्म लेती है? कहा जाता है, 'यत्र नारी पूजयन्ते,
रमन्ते तत्र देवता'. तरह-तरह की परेशानियां झेलना लड़कियों की किस्मत
नहीं है. फिर भी उन पर रुढि़वादी विचार थोपे जाते हैं. यही मजबूरी है, जो
उन्हें हर आस्पेक्ट में अपने आपको प्रूव करना पड़ता है. मुझे गर्व है कि
मैं एक लड़की हूं.
- पूजा आहूजा,
क्ख्वीं-ए, सेंट जोसेफ
आई नेक्स्ट की इस मुहिम की जितनी सराहना की जाए वह कम है. समाज में कन्या
भू्रण हत्या एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है. इसके लिये समाज के हर वर्ग
को एकजुट होना पड़ेगा.
चंदन लाल दीक्षित
अध्यक्ष
लखनऊ बार एसोसिएशन
बिना बेटियों के न घर पूरा होता है और न ही पीढि़यां आगे बढ़ती हैं. इस
हकीकत को जानने के बावजूद लोग बेटों की ललक में बेटियों की गर्भ में ही
हत्या करने पर उतारू हैं. आई नेक्स्ट की इस मुहिम को सलाम.
सुरेश पांडेय
महामंत्री
लखनऊ बार एसोसिएशन
हमेशा की तरह आई नेक्स्ट ने एक ज्वलंत मुद्दा उठाया है. बेटी बचाओ अभियान
वक्त की जरूरत है. अगर बेटी ही नहीं होगी तो मां नहीं होगी और अगर मां
नहीं होगी तो श्रृष्टि ही खत्म हो जाएगी.
आलोक द्विवेदी भाऊ
उपाध्यक्ष
लखनऊ बार एसोसिएशन
आज हर जगह बेटियां कामयाबी के झंडे गाड़ रही हैं. कल्पना चावला रही हों
या फिर सुनीता विलियम्स, इंदिरा नुई हो या किरण मजूमदार शॉ. इन जैसी तमाम
बेटियों की सफलता को देखने के बावजूद लोग अपनी मानसिकता बदलने को तैयार
नहीं जो कि शर्मनाक है.
कामिनी ओझा
संयुक्त मंत्री
लखनऊ बार एसोसिएशन
आई नेक्स्ट का अभियान बेटी बचाओ तारीफ के काबिल है. असलियत में जो लोग
कन्या भ्रूण हत्या करते हैं वह सिर्फ एक बेटी का कत्ल नहीं करते बल्कि
पूरी मानवता का कत्ल करते हैं. इसकी सजा भी बेहद कड़ी होनी चाहिये.
मारुत शर्मा
संयुक्त मंत्री
लखनऊ बार एसोसिएशन

Saturday, September 27, 2014

आरटीआई एक्ट की नौवीं वर्षगाँठ पर दिनांक १२ अक्टूबर २०१४ दिन रविवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में धरना स्थल पर ११ बजे पूर्वान्ह से ३ बजे अपरान्ह तक 'येश्वर्याज सेवा संस्थान' के तत्वावधान में जनजागरूकता कैम्प और जनसुनवाई का आयोजन

प्रेस नोट : आरटीआई एक्ट की नौवीं वर्षगाँठ पर दिनांक १२ अक्टूबर २०१४ दिन रविवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में धरना स्थल पर ११  बजे पूर्वान्ह से ३ बजे अपरान्ह तक पारदर्शिता संवर्धन ,जबाबदेही निर्धारण और मानवाधिकार संरक्षण के मुद्दों पर सामाजिक संगठन 'येश्वर्याज सेवा संस्थान'  के तत्वावधान में जनजागरूकता कैम्प और जनसुनवाई का आयोजन किया जा रहा है l
 
येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा ने बताया कि कैम्प में आरटीआई एक्ट,जनहित गारंटी एक्ट और मानवाधिकारों से सम्बंधित पुस्तिकाओं का निः शुल्क वितरण पहले आइये पहले पाइए के आधार पर किया जायेगा l कैंप में होने बाली जनसुनवाई में आगंतुक इन विषयों   से सम्बंधित अपनी व्यक्तिगत समस्याओं पर विशेषज्ञों से निः शुल्क राय भी प्राप्त कर सकते हैं l उर्वशी शर्मा ने बताया कि अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर ८०८१८९८०८१ अथवा ९४५५५५३८३८ पर एवं ई मेल rtimahilamanchup@gmail.com  पर संपर्क किया जा सकता है l

आरटीआई एक्ट की नौवीं वर्षगाँठ पर दिनांक १२ अक्टूबर २०१४ दिन रविवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में धरना स्थल पर ११ बजे पूर्वान्ह से ३ बजे अपरान्ह तक 'येश्वर्याज सेवा संस्थान' के तत्वावधान में जनजागरूकता कैम्प और जनसुनवाई का आयोजन

प्रेस नोट : आरटीआई एक्ट की नौवीं वर्षगाँठ पर दिनांक १२ अक्टूबर २०१४
दिन रविवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में धरना स्थल पर ११ बजे
पूर्वान्ह से ३ बजे अपरान्ह तक पारदर्शिता संवर्धन ,जबाबदेही निर्धारण और
मानवाधिकार संरक्षण के मुद्दों पर सामाजिक संगठन 'येश्वर्याज सेवा
संस्थान' के तत्वावधान में जनजागरूकता कैम्प और जनसुनवाई का आयोजन किया
जा रहा है l

येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा ने बताया कि कैम्प में
आरटीआई एक्ट,जनहित गारंटी एक्ट और मानवाधिकारों से सम्बंधित पुस्तिकाओं
का निः शुल्क वितरण पहले आइये पहले पाइए के आधार पर किया जायेगा l कैंप
में होने बाली जनसुनवाई में आगंतुक इन विषयों से सम्बंधित अपनी
व्यक्तिगत समस्याओं पर विशेषज्ञों से निः शुल्क राय भी प्राप्त कर सकते
हैं l उर्वशी शर्मा ने बताया कि अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर
८०८१८९८०८१ अथवा ९४५५५५३८३८ पर एवं ई मेल rtimahilamanchup@gmail.com पर
संपर्क किया जा सकता है l


--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
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Tuesday, September 23, 2014

Madras High Court rectifies its order : “No need to give any reason for requesting the information” asserts High Court in rectified order

Madras High Court rectifies its order : "No need to give any reason
for requesting the information" asserts High Court in rectified order


The Madras High Court has on 23-09-2014 (Tuesday) rectified a portion
its own order dated 17-09-14 in which it had said that the person who
seeks information under Right to Information (R.T.I.) should state the
reason for doing so.


"An applicant making a request for information shall not be required
to give any reason for requesting the information or any other
personal details except those that may be necessary for contacting
him," the bench, comprising Justices N Paul Vasanthakumar and K
Ravichandrababu, said on Tuesday while hearing a sue motto review
application.


The bench noticed it had made an error in its order dated 17-09-14 and
rectified it on Tuesday saying Section 6(2) of the R.T.I. Act, 2005,
does not say that the person seeking information has to submit
details.

( From facebook wall of Sanjay Sharma )


--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
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Madras High Court rectifies its order : “No need to give any reason for requesting the information” asserts High Court in rectified order

Madras High Court rectifies its order : "No need to give any reason for requesting the information" asserts High Court in rectified order


The Madras High Court has on 23-09-2014 (Tuesday) rectified a portion its own order dated 18-09-14 in which it had said that the person who seeks information under Right to Information (R.T.I.) should state the reason for doing so.


"An applicant making a request for information shall not be required to give any reason for requesting the information or any other personal details except those that may be necessary for contacting him," the bench, comprising Justices N Paul Vasanthakumar and K Ravichandrababu, said on Tuesday while hearing a sue motto review application.


The bench noticed it had made an error in its order dated 18-09-14 and rectified it on Tuesday saying Section 6(2) of the RTI Act, 2005, does not say that the person seeking information has to submit details.

( From facebook wall of Sanjay Sharma )

देश के उन भ्रष्टों के लिए बुरी खबर है जो आरटीआई से जानकारी लेने के लिए वजह बताना जरूरी करने सम्बन्धी मद्रास हाई कोर्ट के आदेश का पूरा जश्न मना रहे हैं lआज मद्रास हाई कोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लेकर कोर्ट नंबर 3 में सीरियल नंबर 13 पर रिव्यु एप्लीकेशन REV.APLW.258/2014 IN WP.26781/2013 सूचीबद्ध की थी lअब इस अच्छी खबर पर आप तो कुछ मुस्कुराइए l

देश के उन भ्रष्टों के लिए बुरी खबर है जो आरटीआई से जानकारी लेने के लिए
वजह बताना जरूरी करने सम्बन्धी मद्रास हाई कोर्ट के आदेश का पूरा जश्न
मना रहे हैं l

आज मद्रास हाई कोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लेकर कोर्ट नंबर 3 में
सीरियल नंबर 13 पर रिव्यु एप्लीकेशन REV.APLW.258/2014 IN WP.26781/2013
सूचीबद्ध की थी l

अब इस अच्छी खबर पर आप तो कुछ मुस्कुराइए l

कॉजलिस्ट का टेक्स्ट नीचे पाएं l

HIGH COURT OF JUDICATURE AT MADRAS DAILY CAUSE LIST
(For 23rd, September, 2014 )
COURT NO. 3
HON'BLE MR JUSTICE N.PAUL VASANTHAKUMAR
HON'BLE MR JUSTICE K.RAVICHANDRABAABU
TO BE HEARD ON TUESDAY THE 23rd DAY OF SEPTEMBER 2014 AT 10.30 A.M.
AND AGAIN AFTER
DIVISION BENCH SITTING OF HON'BLE MR JUSTICE N.PAUL VASANTHAKUMAR
AND HON'BLE MR JUSTICE P.DEVADASS
------------------------------------------------------------------------------------------------
NO ADJOURNMENT FOR THE FIRST 25 CASES
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
MISCELLANEOUS PETITIONS
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
TO PERMIT THE PETITIONERS TO FILE A SINGLE WP SR.104706/2014

1. MP.1/2014 M/S.R.MANICKAVEL CHENNAI
(SARFAESI) RALPH V.MANOHARI
A.SAM ARUL PRASATH
WP - FOR ADMISSION
~~~~~~~~~~~~~~~~~~

2. WP.25814/2014 M/S.P.RAMESH KUMAR CHENNAI
(SARFAESI) R.SIVARAMAN

3. WP.25833/2014 M/S.D.BASKAR CHENNAI
(Local Auth.) R.SRINIVASALU
and To Dispense With
MP.1/2014 - DO -
and For Stay
MP.2/2014 - DO -

4. WP.25834/2014 M/S.P.MANI TIRUVANNAMALAI
(Land.Ench.) I.CHARLES
M.MAHALAKSHMI
and For Injunction
MP.1/2014 - DO -

5. WP.25848/2014 M/S.A.KALAIVANAN TIRUPPUR
(SARFAESI) R.SRINIVASAN
and For Stay
MP.1/2014 - DO -

6. WP.25849/2014 M/S.C.CHOKKALINGAM TIRUVALLUR
(Land.Ench.) C.MANICKAM
C.SARAVANAN
and For Direction
MP.1/2014 - DO -

7. WP.25858/2014 M/S.M.BASKAR CHENNAI
(SARFAESI) K.K.SENTHILVELAN
K.VIJAYAKUMAR
and To Dispense With
MP.1/2014 - DO -
and For Stay
MP.2/2014 - DO -

8. WP.25866/2014 M/S.L.MOULI COIMBATORE
(Local Auth.)
and For Stay
MP.1/2014 - DO -

9. WP.25871/2014 M/S.L.CHANDRAKUMAR CHENNAI
(Local Auth.) K.G.SENTHILKUMAR
KAMAL HASSAN
and For Injunction
MP.1/2014 - DO -

10. WP.25913/2014 M/S.V.CHINNASAMY COIMBATORE
(Land.Ench.) P.PAUL PRAKASH

11. WP.25923/2014 M/S.A.MUTHUKUMAR COIMBATORE
(Local Auth.) P.SRIVIDHYA
V.SUNDAR
and For Stay
MP.1/2014 - DO -

12. WP.25924/2014 M/S.N.V.S. AND ASSOCIATES CHENNAI
(DRT)
and To Dispense With
MP.1/2014 - DO -
and For Stay
MP.2/2014 - DO -
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

13. REV.APLW.258/2014 SUO MOTU REV.APPLICATION
IN
WP.26781/2013
MISCELLANEOUS PETITIONS
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
TO CONDONE THE DELAY OF 8 DAYS IN FILING THE
REV.APPL.SR.69597/2014 IN WA.434/2014



( From facebook wall of Sanjay Sharma )

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-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
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101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
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Cheers friends......its our victory as Madras High Court moves SUO MOTU REVIEW APPLICATION REV.APLW.258/2014 IN WP.26781/2013.

Bad News for the Corrupt of the nation who are in full party mood over
Madras High Court judgment on RTI.

Good news for the honest.

Cheers friends......its our victory as Madras High Court moves SUO
MOTU REVIEW APPLICATION REV.APLW.258/2014 IN WP.26781/2013.

Take my words,Be sure not to worry about giving reasons before filing a RTI.

The review application was listed at sl. no. 13 in court no. 3 before
bench of HON'BLE MR JUSTICE N.PAUL VASANTHAKUMAR & HON'BLE MR JUSTICE
K.RAVICHANDRABAABU.

Entire cause list is given below------------------->>>>>>>>>>>

HIGH COURT OF JUDICATURE AT MADRAS DAILY CAUSE LIST
(For 23rd, September, 2014 )
COURT NO. 3
HON'BLE MR JUSTICE N.PAUL VASANTHAKUMAR
HON'BLE MR JUSTICE K.RAVICHANDRABAABU
TO BE HEARD ON TUESDAY THE 23rd DAY OF SEPTEMBER 2014 AT
10.30 A.M. AND AGAIN AFTER
DIVISION BENCH SITTING OF HON'BLE MR JUSTICE N.PAUL
VASANTHAKUMAR
AND HON'BLE MR JUSTICE P.DEVADASS
------------------------------------------------------------------------------------------------
NO ADJOURNMENT FOR THE FIRST 25 CASES
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
MISCELLANEOUS PETITIONS
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
TO PERMIT THE PETITIONERS TO FILE A SINGLE WP
SR.104706/2014

1. MP.1/2014 M/S.R.MANICKAVEL CHENNAI
(SARFAESI) RALPH V.MANOHARI
A.SAM ARUL PRASATH
WP - FOR ADMISSION
~~~~~~~~~~~~~~~~~~

2. WP.25814/2014 M/S.P.RAMESH KUMAR CHENNAI
(SARFAESI) R.SIVARAMAN

3. WP.25833/2014 M/S.D.BASKAR CHENNAI
(Local Auth.) R.SRINIVASALU
and To Dispense With
MP.1/2014 - DO -
and For Stay
MP.2/2014 - DO -

4. WP.25834/2014 M/S.P.MANI
TIRUVANNAMALAI
(Land.Ench.) I.CHARLES
M.MAHALAKSHMI
and For Injunction
MP.1/2014 - DO -

5. WP.25848/2014 M/S.A.KALAIVANAN TIRUPPUR
(SARFAESI) R.SRINIVASAN
and For Stay
MP.1/2014 - DO -

6. WP.25849/2014 M/S.C.CHOKKALINGAM TIRUVALLUR
(Land.Ench.) C.MANICKAM
C.SARAVANAN
and For Direction
MP.1/2014 - DO -

7. WP.25858/2014 M/S.M.BASKAR CHENNAI
(SARFAESI) K.K.SENTHILVELAN
K.VIJAYAKUMAR
and To Dispense With
MP.1/2014 - DO -
and For Stay
MP.2/2014 - DO -

8. WP.25866/2014 M/S.L.MOULI COIMBATORE
(Local Auth.)
and For Stay
MP.1/2014 - DO -

9. WP.25871/2014 M/S.L.CHANDRAKUMAR CHENNAI
(Local Auth.) K.G.SENTHILKUMAR
KAMAL HASSAN
and For Injunction
MP.1/2014 - DO -

10. WP.25913/2014 M/S.V.CHINNASAMY COIMBATORE
(Land.Ench.) P.PAUL PRAKASH

11. WP.25923/2014 M/S.A.MUTHUKUMAR COIMBATORE
(Local Auth.) P.SRIVIDHYA
V.SUNDAR
and For Stay
MP.1/2014 - DO -

12. WP.25924/2014 M/S.N.V.S. AND ASSOCIATES CHENNAI
(DRT)
and To Dispense With
MP.1/2014 - DO -
and For Stay
MP.2/2014 - DO -
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

13. REV.APLW.258/2014 SUO MOTU REV.APPLICATION
IN
WP.26781/2013
MISCELLANEOUS PETITIONS
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
TO CONDONE THE DELAY OF 8 DAYS IN FILING THE
REV.APPL.SR.69597/2014 IN WA.434/2014

14. MP.1/2014 M/S.K.RAJA CHENNAI
S.GAJENDRARAJ
N.SURESH
IN
REV.APPL.SR69597/2014
IN
WA.434/2014
(D/O.ON 10/07/2014)
AND TO CONDONE THE DELAY OF 8 DAYS IN FILING THE
REV.APPL.SR.69598/2014 IN WA.2220/2013
MP.1/2014 M/S.K.RAJA CHENNAI
S.GAJENDRARAJ
N.SURESH
IN
REV.APPL.SR69598/2014
IN
WA.2220/2013
(D/O.ON 10/07/2014)
FOR STAY IN WP.16103/2014

14a. MP.1/2014 M/S.R.SHANKAR
M/S.S.SWAMINATHAN
(DRAT) M.KRISHNAMURTHY
R.A.SRIVIDHYA FOR
R............................................................

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Helpline Against Corruption 9455553838


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Note : if you don't want to receive mails from me,kindly inform me so
that i should delete your name from my mailing list.

Cheers friends......its our victory as Madras High Court moves SUO MOTU REVIEW APPLICATION REV.APLW.258/2014 IN WP.26781/2013.

Bad News for the Corrupt of the nation who are in full party mood over Madras High Court judgment on RTI.

Good news for the honest.

Cheers friends......its our victory as Madras High Court moves SUO MOTU REVIEW APPLICATION REV.APLW.258/2014 IN WP.26781/2013.

Take my words,Be sure not to worry about giving reasons before filing a RTI.

The review application was listed at sl. no. 13 in court no. 3  before bench of HON'BLE MR JUSTICE N.PAUL VASANTHAKUMAR & HON'BLE MR JUSTICE K.RAVICHANDRABAABU.

Entire cause list is given below------------------->>>>>>>>>>>

HIGH COURT OF JUDICATURE AT MADRAS DAILY CAUSE LIST
(For 23rd, September, 2014 )
                COURT NO. 3          
                            HON'BLE MR JUSTICE N.PAUL VASANTHAKUMAR
                             HON'BLE MR JUSTICE K.RAVICHANDRABAABU
        TO BE HEARD ON TUESDAY THE 23rd DAY OF SEPTEMBER 2014  AT 10.30 A.M. AND AGAIN AFTER
                  DIVISION BENCH SITTING OF HON'BLE MR JUSTICE N.PAUL VASANTHAKUMAR
                              AND HON'BLE MR JUSTICE P.DEVADASS
------------------------------------------------------------------------------------------------
                              NO ADJOURNMENT FOR THE FIRST 25 CASES
                              ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
                                     MISCELLANEOUS PETITIONS
                                     ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
                     TO PERMIT THE PETITIONERS TO FILE A SINGLE WP SR.104706/2014

1.     MP.1/2014              M/S.R.MANICKAVEL              CHENNAI                              
       (SARFAESI)             RALPH V.MANOHARI                                           
                              A.SAM ARUL PRASATH                                         
                                          WP - FOR ADMISSION
                                          ~~~~~~~~~~~~~~~~~~

2.     WP.25814/2014          M/S.P.RAMESH KUMAR            CHENNAI                              
       (SARFAESI)             R.SIVARAMAN                                                

3.     WP.25833/2014          M/S.D.BASKAR                  CHENNAI                              
       (Local Auth.)          R.SRINIVASALU                                              
       and                    To Dispense With
       MP.1/2014              - DO -                       
       and                    For Stay
       MP.2/2014              - DO -                       

4.     WP.25834/2014          M/S.P.MANI                    TIRUVANNAMALAI                       
       (Land.Ench.)           I.CHARLES                                                  
                              M.MAHALAKSHMI                                              
       and                    For Injunction
       MP.1/2014              - DO -                       

5.     WP.25848/2014          M/S.A.KALAIVANAN              TIRUPPUR                             
       (SARFAESI)             R.SRINIVASAN                                               
       and                    For Stay
       MP.1/2014              - DO -                       

6.     WP.25849/2014          M/S.C.CHOKKALINGAM            TIRUVALLUR                           
       (Land.Ench.)           C.MANICKAM                                                 
                              C.SARAVANAN                                                
       and                    For Direction
       MP.1/2014              - DO -                       

7.     WP.25858/2014          M/S.M.BASKAR                  CHENNAI                              
       (SARFAESI)             K.K.SENTHILVELAN                                           
                              K.VIJAYAKUMAR                                              
       and                    To Dispense With
       MP.1/2014              - DO -                       
       and                    For Stay
       MP.2/2014              - DO -                       

8.     WP.25866/2014          M/S.L.MOULI                   COIMBATORE                           
       (Local Auth.)                                                                     
       and                    For Stay
       MP.1/2014              - DO -                       

9.     WP.25871/2014          M/S.L.CHANDRAKUMAR            CHENNAI                              
       (Local Auth.)          K.G.SENTHILKUMAR                                           
                              KAMAL HASSAN                                               
       and                    For Injunction
       MP.1/2014              - DO -                       

10.    WP.25913/2014          M/S.V.CHINNASAMY              COIMBATORE                           
       (Land.Ench.)           P.PAUL PRAKASH                                             

11.    WP.25923/2014          M/S.A.MUTHUKUMAR              COIMBATORE                           
       (Local Auth.)          P.SRIVIDHYA                                                
                              V.SUNDAR                                                   
       and                    For Stay
       MP.1/2014              - DO -                       

12.    WP.25924/2014          M/S.N.V.S. AND ASSOCIATES     CHENNAI                              
       (DRT)                                                                             
       and                    To Dispense With
       MP.1/2014              - DO -                       
       and                    For Stay
       MP.2/2014              - DO -                       
                                 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
                                 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
                                 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

13.    REV.APLW.258/2014       SUO MOTU REV.APPLICATION
       IN
       WP.26781/2013
                                     MISCELLANEOUS PETITIONS
                                     ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
                              TO CONDONE THE DELAY OF 8 DAYS IN FILING THE
                              REV.APPL.SR.69597/2014 IN WA.434/2014

14.    MP.1/2014              M/S.K.RAJA                    CHENNAI                              
                              S.GAJENDRARAJ                                              
                              N.SURESH                                                   
       IN                    
       REV.APPL.SR69597/2014                               
       IN
       WA.434/2014                                         
       (D/O.ON 10/07/2014)
       AND                    TO CONDONE THE DELAY OF 8 DAYS IN FILING THE
                              REV.APPL.SR.69598/2014 IN WA.2220/2013
       MP.1/2014              M/S.K.RAJA                    CHENNAI                      
                              S.GAJENDRARAJ                                              
                              N.SURESH                                                   
       IN                    
       REV.APPL.SR69598/2014                               
       IN                    
       WA.2220/2013                                        
       (D/O.ON 10/07/2014)
                              FOR STAY IN WP.16103/2014

14a.   MP.1/2014              M/S.R.SHANKAR                 M/S.S.SWAMINATHAN                    
       (DRAT)                 M.KRISHNAMURTHY               R.A.SRIVIDHYA FOR R............................................................
 
{ Taken From facebook wall of Sanjay Sharma }

Monday, September 22, 2014

Bitter truth of Akhileshraj revealed by RTI : UP State Minorities Commission says it never studied status of minorities in UP

http://timesofindia.indiatimes.com/india/UP-State-Minorities-Commission-says-it-never-studied-status-of-minorities-in-UP/articleshow/42711450.cms

Neha Shukla, TNN | Sep 17, 2014, 03.37PM IST
LUCKNOW: Will the status of cabinet minister to its chairman bring a
turnaround for UP State Minorities Commission? UP governor Ram Naik
has questioned the 'haste and urgency' shown by chief minister
Akhilesh Yadav to accord "cabinet minister status" to the chairman of
UP State Minorities Commission. Now, it's the dismal record of the
commission in carrying out its duties which makes the government's
favour to the head of a statutory body which is 'near-redundant' in
the state even more questionable.

The commission has replied in negative to almost every RTI query on
its duties and functions. It says it has no record available on the
number of communal riots that have taken place in UP and has done
nothing to ensure effective implementation of Sachchar committee
recommendations in the state.

The state minorities commission says it has done no study to assess
the progress and growth of minorities in UP, as goes the mandate. It
also has not monitored if the benefits given to minorities under
various laws are reaching the intended in UP. When asked to provide
the list of recommendations made to the government for betterment of
minorities under RTI, the commission sought 'time' to compile the
information due to "dearth of staff and resources."

In between June 2009 and June 2014, commission received about 18,445
complaints but it also included grievances of the commission's own
staff and its internal correspondence. In that case, to say how many
of these complaints had to do with the rights and betterment of
minorities in the state is not possible. The commission has meted out
no (zero) punishment in the five year period, recommended no (zero)
compensation, took up no (zero) complaints for case studies, did no
(zero) study on educational, social and economic issues of the
minorities and have no (zero) annual reports to share.

Among the many objectives of the commission, the important ones are to
study and assess the growth of minorities in the state, act against
any infringement of the rights of minorities and raise the matter at
relevant forums, investigate and resolve any discrimination practiced
against minorities besides preparing and submitting reports on
difficulties faced by minorities to the state government.

RTI applicant Salim Baig who had sought the information has now
written to the governor highlighting the state of the minorities
commission. A single-member Minorities Commission was established in
UP In 1969. Later, in 1974, Commission was constituted with equal
representation from every minority group in the state. It was given
statutory powers in 1994.

Bitter truth of Akhileshraj revealed by RTI : UP State Minorities Commission says it never studied status of minorities in UP


, TNN | Sep 17, 2014, 03.37PM IST
LUCKNOW: Will the status of cabinet minister to its chairman bring a turnaround for UP State Minorities Commission? UP governor Ram Naik has questioned the 'haste and urgency' shown by chief minister Akhilesh Yadav to accord "cabinet minister status" to the chairman of UP State Minorities Commission. Now, it's the dismal record of the commission in carrying out its duties which makes the government's favour to the head of a statutory body which is 'near-redundant' in the state even more questionable.

The commission has replied in negative to almost every RTI query on its duties and functions. It says it has no record available on the number of communal riots that have taken place in UP and has done nothing to ensure effective implementation of Sachchar committee recommendations in the state.

The state minorities commission says it has done no study to assess the progress and growth of minorities in UP, as goes the mandate. It also has not monitored if the benefits given to minorities under various laws are reaching the intended in UP. When asked to provide the list of recommendations made to the government for betterment of minorities under RTI, the commission sought 'time' to compile the information due to "dearth of staff and resources."

In between June 2009 and June 2014, commission received about 18,445 complaints but it also included grievances of the commission's own staff and its internal correspondence. In that case, to say how many of these complaints had to do with the rights and betterment of minorities in the state is not possible. The commission has meted out no (zero) punishment in the five year period, recommended no (zero) compensation, took up no (zero) complaints for case studies, did no (zero) study on educational, social and economic issues of the minorities and have no (zero) annual reports to share.

Among the many objectives of the commission, the important ones are to study and assess the growth of minorities in the state, act against any infringement of the rights of minorities and raise the matter at relevant forums, investigate and resolve any discrimination practiced against minorities besides preparing and submitting reports on difficulties faced by minorities to the state government.

RTI applicant Salim Baig who had sought the information has now written to the governor highlighting the state of the minorities commission. A single-member Minorities Commission was established in UP In 1969. Later, in 1974, Commission was constituted with equal representation from every minority group in the state. It was given statutory powers in 1994.

Sunday, September 21, 2014

Had Judiciary been kept out or RTI ambit, decisions like recent Madras High Court order requiring info-seekers to give reasons to request information not been there.

Dear all.
Had Judiciary been kept out or RTI ambit, decisions like recent
Madras High Court order requiring info-seekers to give reasons to
request information not been there.

While going through the said order of Madras High Court, I came to the
conclusion that the order has been deliberately passed to make RTI
users feel the heat of (misuse of ) powers of Indian judiciary if
someone tries to poke his nose into the affairs of Judiciary.

A humble request to all RTI users, if you wish RTI regime to exist for
some more time, please refrain from filing RTIs related to India
Judiciary or else such judges like Madras High Court shall do such
irreparable harm to the transparency regime about which even the most
corrupt of legislature and executive might have never dreamt of
(because of pressure from civil society group) what to say of you n
me.


--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption 9455553838


http://upcpri.blogspot.in/


Note : if you don't want to receive mails from me,kindly inform me so
that i should delete your name from my mailing list.

Had Judiciary been kept out or RTI ambit, decisions like recent Madras High Court order requiring info-seekers to give reasons to request information not been there.

Dear all.
Had  Judiciary been kept out or RTI ambit, decisions like recent Madras High Court order requiring info-seekers to give reasons to request information not been there.

While going through the said order of Madras High Court, I came to the conclusion that the order has been deliberately passed to make RTI users feel the heat of (misuse of ) powers of Indian judiciary if someone tries to poke his nose into the affairs of Judiciary.

A humble request to all RTI users, if you wish RTI regime to exist for some more time,  please refrain from filing RTIs related to India Judiciary or else such judges like Madras High Court shall do  such irreparable  harm to the transparency regime about which even the most corrupt of legislature and executive might have never dreamt of (because of pressure from civil society group) what to say of you n me.