Tuesday, December 3, 2013

यूपीए-2 की चौथी सालगिरह में एक व्यक्ति की दावत पर 6871 रुपये का खर्चा

http://khabar.ndtv.com/news/india/rti-story-on-upa2-celebration-373927

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यूपीए-2 की चौथी सालगिरह में एक व्यक्ति की दावत पर 6871 रुपये का खर्चा

Ndtvkhabar Team, Last Updated: दिसम्बर 3, 2013 06:18 PM IST

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अलीगढ़: एक तरफ जहां भारत में राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय की एक
रिपोर्ट के अनुसार एक गरीब 17 रुपये प्रतिदिन में गुजर-बसर करता है...
भारत का योजना आयोग 28 रुपये रोजाना खर्च करने वाले को गरीब नहीं मानता
है... और सत्तारूढ़ पार्टी के नेता 12 रुपये में भरपेट भोजन मिलने के दावे
करते हैं... उसी देश की सत्तारूढ़ यूपीए सरकार अपने सालगिरह के जश्न पर
प्रति आगंतुक पर 6871 रुपये खर्च करने से पहले एक बार भी नहीं सोचती है।

यह आंकड़ा तब मिला जब लखनऊ की आरटीआई एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने यूपीए-2
सरकार के चौथे सालगिरह जश्न के आगंतुकों और खर्चे के संबन्ध में
प्रधानमंत्री कार्यालय से सूचना मांगी, जिसके जवाब में कांग्रेस नेतृत्व
वाली यूपीए सरकार की पोल खुल गई।

इस दौरान यूपीए सरकार ने जनता के धन को पानी की तरह बहाया। आरटीआई
एक्टिविस्ट शर्मा से जब बात हुई तो उन्होंने बताया कि बीते 22 नवंबर को
प्रधानमंत्री कार्यालय से जो सूचना मिली है वह बेहद चौंकाने वाली है। 20
मई 2013 को यूपीए सरकार की सालगिरह जश्न में 522 मेहमान निमंत्रित थे
जिनमें से 300 ने जश्न में शिरकत की। यानी जश्न में बुलाए गए लोगों में
से 43% से अधिक अनुपस्थित रहे जो जनता के पैसे से किए जा रहे आयोजन के
नियोजनकताओं की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है कि आखिर क्यों
इतनी बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को आमंत्रित किया गया जो कार्यक्रम में
आने वाले ही नहीं थे।

आए हुए 300 मेहमानों पर किए गए खर्चों के मदवार आंकड़े भी बेहद चौकाने
वाले हैं। प्रति आगंतुक 3,719 रुपये के हिसाब से 11,15,819 रुपये की भारी
भरकम रकम टेंट की व्यवस्था जिसमें

6,20,000 रुपये का वाटर प्रूफ पंडाल, 5,000 रुपये की स्टेज बनी, 2,103
रुपये प्रति आगंतुक के हिसाब से 6,30,874 रुपये खान-पान में और 1,012
रुपये प्रति आगंतुक के हिसाब से 3,03,770 रुपये

की भारी भरकम रकम बिजली व्यवस्था में खर्ची गई। 10,896 रुपये के फूल लाए
गए। कुल मिलाकर 20,61,359 रुपये एक दावत में खर्च कर दिए गए। इस प्रकार
एक मेहमान की मेहमान नवाज़ी में

6,871 रुपये खर्च करने पड़े। मामले की जानकारी देते हुए स्थानीय पत्रकार
चमन शर्मा ने बताया कि बड़ा सवाल यह है कि भारत जैसे गरीब देश की सरकारें
आखिर कब सरकारी पैसे को इस तरह की बिना मतलब शाहखर्ची छोड़कर वास्तव में
इसे जनता पर खर्च करने की सोचेंगी।

आरटीआई का खुलासा, यूपीए के जश्न में पानी की तरह बहा पैसा

http://www.bhaskar.com/article/UP-LUCK-rti-reveal-about-upa-expensive-for-fourth-anniversary-4452543-NOR.html



Home >> Uttar Pradesh >> Lucknow >> Rti Reveal About Upa Expensive For
Fourth Anniversary

Dainik Bhaskar


आरटीआई का खुलासा, यूपीए के जश्न में पानी की तरह बहा पैसा

dainikbhaskar.com | Dec 03, 2013, 13:25PM IST

आरटीआई का खुलासा, यूपीए के जश्न में पानी की तरह बहा पैसा
लखनऊ. भारत में राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय की एक रिपोर्ट के
अनुसार गरीब 17/- प्रतिदिन में गुजर-बसर करते हैं। योजना आयोग 28/-
रोजाना खर्च करने वाले को गरीब नहीं मानती है। जिस देश की सत्तारूढ़
पार्टी के नेता 12/- और 5/- में भरपेट भोजन मिलने के दावे करते हैं, उसी
देश की सत्तारूढ़ सरकार अपनी चौथी सालगिरह के जश्न पर प्रति आगंतुक 6871/-
खर्च करती है।

दरअसल यूपीए-2 सरकार की चौथी सालगिरह जश्न के आगंतुकों और खर्चे के संबंध
में प्रधानमंत्री कार्यालय से सूचना मांगी गई थी। उसके जवाब में पहले कहा
गया कि आगंतुकों के नाम उजागर होने से देश की सुरक्षा को ख़तरा है और
खर्चे के बिल प्रधान मंत्री कार्यालय में प्राप्त नहीं हुए हैं। कुछ माह
इंतज़ार कर पुनः सूचना मांगी गई, यह सोचकर की अब तक तो बिल आ ही गए होंगे।

लेकिन इस बार उनके जबाब में आया कि सूचनाएं प्रधानमंत्री कार्यालय से
संबंधित ही नहीं हैं। इसी क्रम में एक अपील प्रधानमंत्री कार्यालय के
अपीलीय अधिकारी को भेजी गई। अपीलीय अधिकारी के दखल के बाद बीते 22 नवम्बर
को जो सूचना मिली है, वह बेहद चौकाने वाली हैं।

प्राप्त सूचना के अनुसार इस सालगिरह जश्न में 522 मेहमान निमंत्रित थे।
इनमें से 300 ने इस सालगिरह जश्न में शिरकत की। आए हुए 300 मेहमानों पर
किए गए खर्चों के आंकड़े भी उससे भा ज्यादा चौकाने वाले हैं। प्रधानमंत्री
द्वारा दी गई सूचना के अनुसार इस कार्यक्रम में प्रति आगंतुक 3719/- की
भारी भरकम रकम टेंट की व्यवस्था में, 2103/- प्रति आगंतुक की भारी भरकम
रकम खान-पान में और 1012/- प्रति आगंतुक की भारी भरकम रकम बिजली व्यवस्था
में खर्च की गई।

अब बड़ा सबाल यह है कि भारत जैसे गरीब देश की सरकारें आखिर कब तक सरकारी
पैसे की इस तरह की शाहखर्ची छोड़कर वास्तव में जनता का पैसा वास्तव में
जनता पर ही खर्च करने का सोचेगी।

गरीब 'जन' के शाही 'प्रतिनिधि' : एक आदमी की दावत पर उड़ाए 6871 रुपये

गरीब 'जन' के शाही 'प्रतिनिधि' : एक आदमी की दावत पर उड़ाए 6871 रुपये

http://www.cityaajkal.com/news1/index.php/news/aligarh-news/2518-2013-12-03-05-31-08.html


सत्तारूढ़ यूपीए सरकार की सालगिरह दावत में 6871 रुपये खर्च करने पड़े एक मेहमान पर

अलीगढ़ : चुनावी सरगर्मियों के इस मौसम में जनता का सही प्रतिनिधि होने
का दम भरने वाले सभी उम्मीदवार बरसाती मेढकों की तरह टर्राते नजर आ रहे
हैं।

गरीब जनता को चांद-तारे तोड़कर ला देने जैसे न जाने क्या-क्या अकल्पनीय
वादे किए जा रहे हैं। जनता पशोपेश में है कि उसे 'नागनाथों' और
'सांपनाथों' में से ही किसी को चुनना पड़ेगा। अगर वह न भी चुनना चाहे तो
भी कोई न कोई नागनाथ या सांपनाथ तो चुन ही जाएगा क्योंकि हमारा सिस्टम ही
ऐसा है।

यदि ऐसा नहीं होता तो इस भारत में राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय की
एक रिपोर्ट के अनुसार एक गरीब 17 रुपये प्रतिदिन में गुजर-बसर करता है।
भारत का योजना आयोग 28 रुपये रोजाना खर्च करने वाले को गरीब नहीं मानता
है, सत्तारूढ़ पार्टी के नेता 12 रुपये में भरपेट भोजन मिलने के दावे करते
हैं। उसी देश की सत्तारूढ़ यूपीए सरकार अपने सालगिरह जश्न पर प्रति आगंतुक
पर 6871 रुपये खर्च करने से पहले एक बार भी नहीं सोचती।

लखनऊ की आरटीआई एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने यूपीए-2 सरकार के चौथे
सालगिरह जश्न के आगंतुकों और खर्चे के संबन्ध में प्रधानमंत्री कार्यालय
से सूचना मांगी थी जिसके जवाब में मिली सूचना ने कांग्रेस नेतृत्व वाली
यूपीए सरकार की पोल खोलकर रख दी।

यूपीए सरकार ने जनता के धन को पानी की तरह बहा दिया। आरटीआई एक्टिविस्ट
उर्वशी शर्मा से जब समीक्षा भारती की बात हुई तो उन्होंने बताया कि बीते
22 नवंबर को प्रधानमंत्री कार्यालय से जो सूचना मिली है वह बेहद चौंकाने
वाली है।

20 मई 2013 को यूपीए सरकार की सालगिरह जश्न में 522 मेहमान निमंत्रित थे
जिनमें से 300 ने जश्न में शिरकत की। यानी जश्न में बुलाए गए लोगों में
से 43% से अधिक अनुपस्थित रहे जो जनता के पैसे से किए जा रहे आयोजन के
नियोजनकताओं की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है कि आखिर क्यों
इतनी बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को आमंत्रित किया गया जो कार्यक्रम में
आने वाले ही नहीं थे।

आए हुए 300 मेहमानों पर किए गए खर्चों के मदवार आंकड़े भी बेहद चौकाने
वाले हैं। प्रति आगंतुक 3,719 रुपये के हिसाब से 11,15,819 रुपये की भारी
भरकम रकम टेंट की व्यवस्था जिसमें 6,20,000 रुपये का वाटर प्रूफ पंडाल,
5,000 रुपये की स्टेज बनी, 2,103 रुपये प्रति आगंतुक के हिसाब से
6,30,874 रुपये खान-पान में और 1,012 रुपये प्रति आगंतुक के हिसाब से
3,03,770 रुपये की भारी भरकम रकम बिजली व्यवस्था में खर्ची गई। 10,896
रुपये के फूल लाए गए। कुल मिलाकर 20,61,359 रुपये एक दावत में खर्च कर
दिए गए। इस प्रकार एक मेहमान की मेहमान नवाज़ी में 6,871 रुपये खर्च करने
पड़े। बड़ा सवाल यह है कि भारत जैसे गरीब देश की सरकारें आखिर कब सरकारी
पैसे की इस तरह की बेमतलब शाहखर्ची छोड़कर वास्तव में जनता का पैसा जनता
पर ही खर्चने को सोचेंगी।

Monday, December 2, 2013

rti lucknow news Avadh Prant 031213

--
- Urvashi Sharma
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption 9455553838
http://yaishwaryaj-seva-sansthan.hpage.co.in/

http://upcpri.blogspot.in/

rti lucknow news rashtreeya swaroop 031213

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- Urvashi Sharma
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Helpline Against Corruption 9455553838
http://yaishwaryaj-seva-sansthan.hpage.co.in/

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केंद्र सरकार की चौथी वर्षगांठ की दावत पर 6871/- रुपये में एक व्यक्ति ने एक समय खाना खाया

http://jnilive.mobi/2013/12/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%A5%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B7/

JNI NEWS : 02-12-2013 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS
बात चौकाने वाली नहीं शर्मशार करने वाली जरुर है| जिस देश की सरकार एक
व्यक्ति को 28 रुपये प्रतिदिन खर्चे से ज्यादा खर्च करने पर गरीब नहीं
मानती| जिस भारत में राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय की एक रिपोर्ट
के अनुसार निपट गरीब 17/- प्रतिदिन में गुजर-बसर करते हैं, जिस भारत का
योजना आयोग 28/- रोजाना खर्च करने बाले को गरीब नहीं मानता है, जिस देश
की सत्तारूढ़ पार्टी के नेता 12 /- और 5 /- में भरपेट भोजन मिलने के दावे
करते हैं उसी देश की सत्तारूढ़ सरकार अपने चौथे सालगिरह जश्न पर प्रति
आगंतुक 6871 /- खर्च खर्च कर देती है|

लखनऊ की आरटीआई एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय से
अपील के बाद जुताई गयी सूचना बाकई आम आदमी के लिए जान लेना जरुरी है|
प्राप्त सूचना के अनुसार इस सालगिरह जश्न में 522 मेहमान निमंत्रित थे|
जिनमे से 300 ने इस सालगिरह जश्न में शिरकत की ल आगंतुकों की संख्या से
स्पष्ट है कि जश्न में बुलाये गए लोगों में से 43% से अधिक अनुपस्थित रहे
जो जनता के पैसे से किये जा रहे आयोजन के नियोजनकताओं की कार्यप्रणाली पर
एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है कि आखिर क्यों इतनी बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को
आमंत्रित किया गया जो कार्यक्रम में आने बाले ही नहीं थे l

आये हुए 300 मेहमानों पर किये गए खर्चों के मदवार आंकड़े भी बेहद चौकाने
बाले हैंl प्रधानमंत्री द्वारा दी गयी सूचना के अनुसार इस कार्यक्रम में
प्रति आगंतुक 3719/- प्रति आगंतुक की भारी भरकम रकम टेंट की व्यवस्था
में,2103 /- प्रति आगंतुक की भारी भरकम रकम खान-पान में और 1012 /- प्रति
आगंतुक की भारी भरकम रकम बिजली व्यवस्था में खर्ची गयी|

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गरीब 'जन' के शाहखर्च 'प्रतिनिधि'

http://www.instantkhabar.com/lucknow/item/11493-lucknow.html

उर्वशी शर्मा उर्वशी शर्मा
लखनऊ: चुनावी सरगर्मियों के इस मौसम में जनता का सही प्रतिनिधि होने का
दम भरने वाले सभी उम्मीदवार बरसाती मेढकों की तरह टर्राते नजर आ रहे है|
गरीब जनता को चाँद तारे तोड़कर ला देने जैसे न जाने क्या क्या अकल्पनीय
वादे किये जा रहे हैं| जनता पशोपेश में है और यह भी जानती है कि उसे
नागनाथों और साँपनाथों में से ही किसी को चुनना पड़ेगा | अगर वह न भी
चुनना चाहे तो भी कोई न कोई नागनाथ या सांपनाथ तो चुन ही जाएगा क्योंकि
हमारा सिस्टम ही ऐसा है| आपको ये बातें हताशा भरी लग रही होंगी पर अब ये
हताशा ही भारत के लोक' की नियति बनती दिखाई दे रही है और पता नहीं इससे
हमारा तंत्र इससे कब उबरेगा ?

यदि ऐसा नहीं होता तो जिस भारत में राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय
की एक रिपोर्ट के अनुसार निपट गरीब 17/- प्रतिदिन में गुजर-बसर करते
हैं, जिस भारत का योजना आयोग 28/- रोजाना खर्च करने बाले को गरीब नहीं
मानता है, जिस देश की सत्तारूढ़ पार्टी के नेता 12 /- और 5 /- में भरपेट
भोजन मिलने के दावे करते हैं उसी देश की सत्तारूढ़ सरकार अपने चौथे
सालगिरह जश्न पर प्रति आगंतुक 6871 /- खर्च करने से पहले हज़ार बार
सोचती|

लखनऊ स्थित आरटीआई वर्कर और समाज सेविका उर्वशी शर्मा ने बताया कि
उन्होंने बीते मई में यूपीए-2 सरकार के चौथे सालगिरह जश्न के आगंतुकों और
खर्चे के सम्बन्ध में प्रधानमंत्री कार्यालय से सूचना माँगी थी| उस समय
यह कहा गया कि आगंतुकों के नाम उजागर होने से देश की सुरक्षा को ख़तरा है
और खर्चे के बिल प्रधान मंत्री कार्यालय में प्राप्त नहीं हुए हैं| कुछ
माह इंतज़ार कर बीते अगस्त में उर्वशी ने पुनः सूचना यह सोचकर माँगी कि
अब तक तो बिल आ ही गए होंगे और आगंतुकों के नाम के स्थान पर उनकी संख्या
माँगी ताकि देश भी सुरक्षित रहे और उनका भी काम हो जाये| उर्वशी को तब
आश्चर्य हुआ जब प्रधानमंत्री कार्यालय के उन्ही जनसूचना अधिकारी ने सूचना
न देने के दूषित उद्देश्य से उनके दूसरे आवेदन पर पहले आवेदन के उनके
जवाब से उलट लिखा कि सूचनाएं प्रधानमंत्री कार्यालय से सम्बंधित ही नहीं
हैं| उर्वशी ने बताया कि देश के सर्वोच्च प्रशासनिक कार्यालय द्वारा देश
की सरकार की शाहखर्ची छुपाने के इस कुत्सित प्रयास से मुझे गहरा आघात लगा
और मैंने अपनी वेदना और शिकायत अपील के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय
के अपीलीय अधिकारी को भेजी| मेरी मजबूत आपत्तियों पर अपीलीय अधिकारी के
दखल के बाद बीते 22 नवम्बर को मुझे जो सूचना मिली है वह बेहद चौकाने वाली
है|

प्राप्त सूचना के अनुसार इस सालगिरह जश्न में 522 मेहमान निमंत्रित थे
जिनमे से 300 ने इस सालगिरह जश्न मंर शिरकत की|आगंतुकों की संख्या से
स्पष्ट है कि जश्न में बुलाये गए लोगों में से 43% से अधिक अनुपस्थित
रहे जो जनता के पैसे से किये जा रहे आयोजन के नियोजनकताओं की
कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है कि आखिर क्यों इतनी बड़ी संख्या
में ऐसे लोगों को आमंत्रित किया गया जो कार्यक्रम में आने वाले ही नहीं
थे|

आये हुए 300 मेहमानों पर किये गए खर्चों के मदवार आंकड़े भी बेहद चौकाने
वाले हैं | प्रधानमंत्री द्वारा दी गयी सूचना के अनुसार इस कार्यक्रम
में प्रति आगंतुक 3719/- प्रति आगंतुक की भारी भरकम रकम टेंट की व्यवस्था
में,2103 /- प्रति आगंतुक की भारी भरकम रकम खान-पान में और 1012 /- प्रति
आगंतुक की भारी भरकम रकम बिजली व्यवस्था में खर्ची गयी l

बड़ा सबाल यह है कि भारत जैसे गरीब देश की सरकारें आखिर कब सरकारी पैसे की
इस तरह की बेमतलब शाहखर्ची छोड़कर वास्तव में जनता का पैसा वास्तव में
जनता पर ही खर्च करने का सोचेंगी l

उर्वशी ने कहा कि शायद मेरे अकेले ये सवाल उठाने से कुछ नहीं होने वाला
है क्योंकि जब तक सारा हिंदुस्तान ये सवाल नहीं उठाएगा तब तक कुछ भी नहीं
होने वाला है| उर्वशी को पूरी आशा है कि कभी न कभी भारत की जनता इस तरह
की बेशर्म सरकारों के सोये पड़े जमीर को , जिनके लिए एक तरफ तो 28 /-
प्रतिदिन कमाने वाला व्यक्ति गरीब नहीं लगता वही दूसरी ओर वे एक बेमतलब
जश्न पर एक व्यक्ति के एक समय के भोजन और इंतजाम पर 6871/- खर्च कर देती
हैं , को जागने पर आमादा अवश्य कर देगी|

खबर की श्रेणी लखनऊ

Tagged under urvashi sharma

UPA spends Rs 20L on lavish 4th anniversary bash

http://timesofindia.indiatimes.com/city/lucknow/UPA-spends-Rs-20L-on-lavish-4th-anniversary-bash/articleshow/26758598.cms

Arunav Sinha,TNN | Dec 3, 2013, 04.54 AM IST

LUCKNOW: A few months ago Congress MP from Firozabad Raj Babbar had
said that a person can have full meals all day for Rs 12, while his
former Rajya Sabha colleague Rashid Masood claimed a meal can be
bought for Rs 5 in Delhi's Jama Masjid area. On the other hand, on the
fourth anniversary bash of the United Progressive Alliance, the
statements of both Congress leaders seem a cruel contrast to findings
in RTI documents that cost incurred at the party was Rs 6,871 per
guest, while total expenditure incurred on the May 22 event was Rs
20,61,359.

RTI document available with TOI states that out of 522 guests invited
to the function, only 300 eventually turned up. The total cost
incurred on floral decoration was Rs 10,896, while electricity charges
for the day was Rs 3,03,770. The bills pertaining to catering and tent
charges are still "under process", and as per RTI documents, they
stand at Rs 6,30,874 and Rs11,15,819. The sum total of these charges
is Rs 20,61,359.

The break-up of the material provided at 7, Race Course Road by Priya
Decorators (Tyagraj Market, Prem Nagar, New Delhi) is 31,000 square
feet waterproof pandal (@ Rs 20 per square feet), 22,322 square feet
white ceiling (@ Rs 10 per square feet), border measuring 5,700 square
feet (@ Rs 10 per square feet), 126 pillar covers (@ Rs 75 each),
jhaalar covering 120 feet (@ Rs 5 per feet), side wall cover measuring
140 square feet (@ Rs 5.75 per square feet), a stage and 40 trips of
cartage (@ Rs 800). The cost incurred in the waterproof pandal was Rs
6,20,000, on white ceiling Rs 2,23,220. Similarly, the cost of the
border was Rs 57,000. The total cost of the pillar cover, jhaalar and
side wall cover were Rs 9,450, Rs 600 and Rs 800, respectively. The
complete stage cost Rs 50,000 and the total cost incurred on cartage
was Rs 32,000. A service tax of Rs 1,22,744 (@12.36%) was also charged
by the decorator.

The non-vegetarian dinner package, which was ordered from Taj Palace
Hotel (Sardar Patel Marg, Diplomatic Enclave) as buffet dinner for 300
guests was worth Rs 6,30,874. The per head cost incurred on the lavish
food was Rs 1,525 for the event, which lasted for nearly 5 hours (7.00
pm to midnight).

RTI applicant Urvashi Sharma had claimed that the prime minister's
office had earlier expressed its inability to provide the list of the
guests invited for the occasion owing to security reasons.

UPA spends Rs 20L on lavish 4th anniversary bash


,TNN | Dec 3, 2013, 04.54 AM IST

LUCKNOW: A few months ago Congress MP from Firozabad Raj Babbar had said that a person can have full meals all day for Rs 12, while his former Rajya Sabha colleague Rashid Masood claimed a meal can be bought for Rs 5 in Delhi's Jama Masjid area. On the other hand, on the fourth anniversary bash of the United Progressive Alliance, the statements of both Congress leaders seem a cruel contrast to findings in RTI documents that cost incurred at the party was Rs 6,871 per guest, while total expenditure incurred on the May 22 event was Rs 20,61,359.

RTI document available with TOI states that out of 522 guests invited to the function, only 300 eventually turned up. The total cost incurred on floral decoration was Rs 10,896, while electricity charges for the day was Rs 3,03,770. The bills pertaining to catering and tent charges are still "under process", and as per RTI documents, they stand at Rs 6,30,874 and Rs11,15,819. The sum total of these charges is Rs 20,61,359.

The break-up of the material provided at 7, Race Course Road by Priya Decorators (Tyagraj Market, Prem Nagar, New Delhi) is 31,000 square feet waterproof pandal (@ Rs 20 per square feet), 22,322 square feet white ceiling (@ Rs 10 per square feet), border measuring 5,700 square feet (@ Rs 10 per square feet), 126 pillar covers (@ Rs 75 each), jhaalar covering 120 feet (@ Rs 5 per feet), side wall cover measuring 140 square feet (@ Rs 5.75 per square feet), a stage and 40 trips of cartage (@ Rs 800). The cost incurred in the waterproof pandal was Rs 6,20,000, on white ceiling Rs 2,23,220. Similarly, the cost of the border was Rs 57,000. The total cost of the pillar cover, jhaalar and side wall cover were Rs 9,450, Rs 600 and Rs 800, respectively. The complete stage cost Rs 50,000 and the total cost incurred on cartage was Rs 32,000. A service tax of Rs 1,22,744 (@12.36%) was also charged by the decorator.

The non-vegetarian dinner package, which was ordered from Taj Palace Hotel (Sardar Patel Marg, Diplomatic Enclave) as buffet dinner for 300 guests was worth Rs 6,30,874. The per head cost incurred on the lavish food was Rs 1,525 for the event, which lasted for nearly 5 hours (7.00 pm to midnight).

RTI applicant Urvashi Sharma had claimed that the prime minister's office had earlier expressed its inability to provide the list of the guests invited for the occasion owing to security reasons.

गरीब 'जन' के शाहखर्च 'प्रतिनिधि'


उर्वशी शर्मा उर्वशी शर्मा
लखनऊ: चुनावी सरगर्मियों के इस मौसम में जनता का सही प्रतिनिधि होने का दम भरने वाले सभी उम्मीदवार बरसाती मेढकों की तरह टर्राते नजर आ रहे है| गरीब जनता को चाँद तारे तोड़कर ला देने जैसे  न जाने क्या क्या अकल्पनीय वादे किये जा रहे हैं| जनता पशोपेश में है और यह भी जानती है कि उसे नागनाथों और साँपनाथों में से ही किसी को चुनना पड़ेगा | अगर वह न भी चुनना चाहे तो भी कोई न कोई नागनाथ या सांपनाथ तो चुन ही जाएगा क्योंकि हमारा सिस्टम ही ऐसा है| आपको ये बातें हताशा भरी लग रही होंगी पर अब ये हताशा ही भारत के लोक' की नियति बनती दिखाई दे रही है और पता नहीं इससे हमारा तंत्र इससे कब उबरेगा ?

यदि ऐसा नहीं होता तो जिस भारत में राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय की एक  रिपोर्ट के अनुसार निपट गरीब 17/- प्रतिदिन में गुजर-बसर करते हैं, जिस भारत का योजना आयोग 28/- रोजाना खर्च करने बाले को गरीब नहीं मानता है, जिस देश की सत्तारूढ़ पार्टी के नेता 12 /- और 5 /- में भरपेट भोजन मिलने के दावे करते हैं उसी देश की सत्तारूढ़ सरकार अपने चौथे सालगिरह जश्न पर  प्रति आगंतुक 6871 /- खर्च करने से पहले हज़ार बार सोचती|

लखनऊ स्थित आरटीआई वर्कर और समाज सेविका उर्वशी शर्मा ने बताया कि उन्होंने बीते मई में यूपीए-2 सरकार के चौथे सालगिरह जश्न के आगंतुकों और खर्चे के सम्बन्ध में प्रधानमंत्री कार्यालय से सूचना माँगी थी| उस समय यह कहा गया कि आगंतुकों के नाम उजागर होने से देश की सुरक्षा को ख़तरा है और खर्चे के बिल प्रधान मंत्री कार्यालय में प्राप्त नहीं हुए हैं| कुछ माह  इंतज़ार कर बीते अगस्त में उर्वशी ने पुनः सूचना यह सोचकर माँगी कि अब तक तो बिल आ ही गए होंगे और आगंतुकों के नाम के स्थान पर उनकी संख्या माँगी ताकि देश भी सुरक्षित रहे और उनका भी काम हो जाये| उर्वशी को तब आश्चर्य हुआ जब प्रधानमंत्री कार्यालय के उन्ही जनसूचना अधिकारी ने सूचना न देने के दूषित उद्देश्य से उनके दूसरे आवेदन पर पहले आवेदन के उनके जवाब से उलट लिखा कि सूचनाएं प्रधानमंत्री कार्यालय से सम्बंधित ही नहीं हैं| उर्वशी ने बताया कि देश के सर्वोच्च प्रशासनिक कार्यालय द्वारा देश की सरकार की शाहखर्ची छुपाने के इस कुत्सित प्रयास से मुझे गहरा आघात लगा और मैंने अपनी वेदना और शिकायत अपील के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय के अपीलीय अधिकारी को भेजी| मेरी मजबूत आपत्तियों पर अपीलीय अधिकारी के दखल के बाद बीते 22 नवम्बर को मुझे जो सूचना मिली है वह बेहद चौकाने वाली है|

प्राप्त सूचना के अनुसार इस सालगिरह जश्न में 522 मेहमान निमंत्रित थे जिनमे से 300 ने इस  सालगिरह जश्न मंर शिरकत की|आगंतुकों की संख्या से स्पष्ट है कि जश्न में बुलाये गए लोगों में से 43%  से अधिक अनुपस्थित रहे जो जनता के पैसे से किये जा रहे आयोजन के नियोजनकताओं की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है कि आखिर क्यों इतनी बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को आमंत्रित किया गया जो कार्यक्रम में आने वाले ही नहीं थे|

आये हुए 300 मेहमानों पर किये गए खर्चों के मदवार आंकड़े भी बेहद  चौकाने वाले  हैं | प्रधानमंत्री द्वारा दी गयी सूचना के अनुसार इस कार्यक्रम में प्रति आगंतुक 3719/- प्रति आगंतुक की भारी भरकम रकम टेंट की व्यवस्था में,2103 /- प्रति आगंतुक की भारी भरकम रकम खान-पान में और 1012 /- प्रति आगंतुक की भारी भरकम रकम बिजली व्यवस्था में खर्ची गयी l

बड़ा सबाल यह है कि भारत जैसे गरीब देश की सरकारें आखिर कब सरकारी पैसे की इस तरह की बेमतलब शाहखर्ची छोड़कर वास्तव में जनता का पैसा वास्तव में जनता पर ही खर्च करने का सोचेंगी l

उर्वशी ने कहा कि शायद मेरे अकेले ये सवाल उठाने से कुछ नहीं होने वाला है क्योंकि जब तक सारा हिंदुस्तान ये सवाल नहीं उठाएगा तब तक कुछ भी नहीं होने वाला है| उर्वशी को पूरी आशा है कि कभी न कभी भारत की जनता इस तरह की बेशर्म सरकारों के सोये पड़े जमीर को , जिनके लिए एक तरफ तो 28 /- प्रतिदिन कमाने वाला व्यक्ति गरीब नहीं लगता  वही दूसरी ओर वे एक बेमतलब जश्न पर एक व्यक्ति के एक समय के भोजन और इंतजाम पर 6871/- खर्च कर देती हैं , को जागने पर आमादा अवश्य कर देगी|

खबर की श्रेणी लखनऊ

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Sunday, December 1, 2013

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आरटीआई लखनऊ

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सूचना का अधिकार लखनऊ

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लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत में येश्वर्याज सेवा संस्थान के तत्वावधान में 'आरटीआई रत्न' सम्मान समारोह एवं सेमिनार 07दिसंबर 2013

लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत में येश्वर्याज सेवा संस्थान के तत्वावधान में
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Saturday, November 30, 2013

'RTI Ratna' Award Function & 'National RTI Seminar' in Lucknow on 07-12-13, Banner Released

Dear Driends,

YAISHWARYAJ Seva Sansthaan is organizing 'RTI Ratna' Award Function & 'National RTI Seminar' in Lucknow .Uttar Pradesh, India on 07-12-2013 ( Saturday ) From 11 AM to 3 PM.


Today We are releasing the banner of the said program for circulation.

Please be with us to share your rich experiences .

the banner can be downloaded from given link

regards,

Urvashi Sharma
  

RTI Ratna Award Function & National RTI Seminar in Lucknow Uttar Pradesh India by YAISHWARYAJ Seva Sansthaan banner

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Pradesh India by YAISHWARYAJ Seva Sansthaan banner

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Friday, November 29, 2013

आरटीआई पर केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के 'हाथी के दांत' उजागर: RTI

लखनऊ| एक कहावत है 'पर उपदेश कुशल बहुतेरे'l यदि बात आरटीआई के सिलसिले में की जाये तो यह कहावत 'आम आदमी पार्ट ' और इसके संयोजक अरविन्द केजरीवाल पर शत प्रतिशत चरितार्थ होती प्रतीत होती है l

क्या आप ऐसा मानेंगे कि जिस आम आदमी पार्टी के सभी दिग्गज चेहरे पूर्व में आरटीआई के अभियानों से जुड़े रहे हैं, जिसके संयोजक अरविन्द केजरीवाल आरटीआई के क्षेत्र में अतुलनीय प्रयास करने के लिए मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किये जा चुके हैं और जो पार्टी राजनैतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाने की हिमायती होने का दम भरने के साथ साथ पारदर्शिता से आगे भी लोकपाल जैसी संस्थाओं के गठन की समर्थन करती दिखाई सुनायी देती है| उसी आम आदमी पार्टी ने आरटीआई की अर्जी पर 30 दिनों में दिए जाने की अनिवार्यता बाली सूचना 50 दिनों में भी नहीं दी हैl

दरअसल लखनऊ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर संजय शर्मा ने.............................................................

Read full story at given link

Thursday, November 28, 2013

क्या आयोग कैबिनेट मंत्री को नोटिस जारी करेगा ? ----------------Shall UPSIC be courageous enough to issue notice to cabinet minister Ahmad Hasan ?..............................सूचना आयोग जांच रहा है कैबिनेट मंत्री अहमद हसन के बड़बोलेपन का सच l ………………….Cabinet Minister Ahmad Hasan's statements are on RTI anvil.

 
प्रिय मित्र ,
 
आपको याद होगा कि चिकित्सा स्वास्थ्यय एवं परिवार कल्याण मंत्री अहमद हसन ने बीते अप्रैल माह में  उत्तर प्रदेश  सरकार के डॉक्टरों के सम्बन्ध में  हैरान कर देने बाले सार्वजनिक  वक्तव्य दिए गए थे l  मातृत्व दिवस पर आयोजित एक कार्यशाला में इन माननीय ने कहा था  कि ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में तैनात 20 प्रतिशत डॉक्टर महकमे की छवि धूमिल करने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ये स्थानीय माफिया से मिलकर दादागीरी करते हैं। मरीजों को धमकाते हैं। कुल मिलाकर यह सब गुंडे हैं।  शहरी क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में तैनात 80 फीसद डॉक्टर बेहतर काम कर रहे हैं। सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टरों को सुधारने की सारी कवायद फेल हो गई है। ये डॉक्टर मरीजों को ठीक से इलाज मुहैया नहीं कराते हैं। ग्रामीण जब विरोध करते हैं तो डॉक्टर मरीज व उनके तीमारदारों को फर्जी मुकदमों में फंसा देते हैं। ऐसा सलूक करने वाले डॉक्टरों की वजह से स्वास्थ्य महकमे की छवि धूमिल हो रही है  आदि आदि l
 
 
 
 
इससे सम्बंधित समाचारों के प्रसार से मुझे  इसकी जानकारी होने पर  मुझे हसन के  वक्तव्य सत्यता से परे प्रतीत हुए और मैंने मामले की तह तक जाने के लिए बीते अप्रैल में  ही  चिकित्सा स्वास्थ्यय एवं परिवार कल्याण  उत्तर प्रदेश शासन के जनसूचना अधिकारी से सूचना माँगी थी l जनसूचना अधिकारी द्वारा सूचना न दिए जाने पर मैंने विभाग में ही प्रथम अपील की और फिर भी सूचना न मिलने पर बीते जुलाई में उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की l
 
 
 
 
उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के सचिव ने इस सम्बन्ध में वाद संख्या  S-1/3455/C/2013 पंजीकृत किया है और पत्र संख्या 5739 दिनांक 20-11-13 के माध्यम से मुझे नोटिस देकर हसन  के वक्तव्यों के सम्बन्ध में प्रमाण सहित आख्या माँगी है और हसन  द्वारा बताये गए प्रतिशत का आधार भी पूंछा है lक्योंकि हसन  द्वारा दिए गए वक्तव्यों को  प्रमाणित करने बाले कोई भी प्रमाण  शासन ने मुझे सूचना मांगे जाने से आज तक  उपलब्ध नहीं कराये हैं तो ऐसे में उनके  बयानों के सम्बन्ध में मेरे पास न तो कोई प्रमाण है और न ही  उनके  द्वारा बताये गए प्रतिशत का कोई आधार l
 
 
 
 
अतः मैंने पत्र लिखकर हसन से अपेक्षा की है कि वे उनके  द्वारा  दिए गए सार्वजनिक  वक्तव्यों की सत्यता प्रमाणित करने बाले प्रमाणों सहित उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होकर उत्तर प्रदेश  सरकार के उन जैसे एक कैबिनेट मंत्री के सार्वजनिक  वक्तव्यों को असत्य  होने से बचाने का कष्ट करें अन्यथा उत्तर प्रदेश के एक कैबिनेट मंत्री और उन   जैसे वरिष्ठ नेता के सार्वजनिक वयान असत्य सिद्ध होने  पर उत्तर प्रदेश की छवि समस्त भू-मंडल में ख़राब हो जायेगी l
 
 
 
 
मुझे पूर्ण विश्वास है कि हसन  ऐसा कभी नहीं चाहेंगे कि उनके  द्वारा उनके  ही विभाग की कार्यप्रणाली के सम्बन्ध में दिए गए वक्तव्य असत्य सिद्ध हो और उत्तर प्रदेश की छवि समस्त भू-मंडल में धूमिल हो अतः मेरा पूर्ण विश्वास  है कि व्यापक लोकहित में वे  स्वयं द्वारा  दिए गए सार्वजनिक  वक्तव्यों की सत्यता प्रमाणित करने बाले प्रमाणों सहित दिनांक 28 नवम्बर  2013 दिन गुरूवार को उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि के माध्यम से अवश्य उपस्थित होंगे  l
 
 
 
 
सूचना आयोग का पत्र मुझे 27 नवम्बर 13 को मिला  l मंत्री जी को सूचित करने हेतु पत्र लिखकर मैंने फैक्स के माध्यम से प्रेषित करने का प्रयास किया पर फैक्स जा नहीं पाया और मैंने ये पत्र मंत्री जी के विभाग के प्रमुख सचिव के माध्यम से 27 नवम्बर 13 दीपाधार बाद ई मेल से भेजा जिसकी प्रति नीचे दी जा रही है  l
 
 
 
 
मैंने इस वाद संख्या S-1/3455/C/2013 की दिनांक 28 नवम्बर  2013 दिन गुरूवार को होने बाली सुनवाई के रिकॉर्ड में लेने हेतु मैं स्वयं आयोग में उपस्थित होकर एक पत्र आयोग को देकर अनुरोध करूंगी  कि यदि हसन आज की सुनवाई में नहीं आते हैं तो आयोग माननीय मंत्री जी को नोटिस भेजकर आयोग के समक्ष बुलाकर उनका पक्ष जानकार मुझे वांछित सूचना उपलब्ध कराए l आज प्रातः ही यह पत्र आयोग को तथा मंत्री श्री अहमद हसन को उनके विभाग के प्रमुख सचिव के माध्यम से ई मेल से भी भेजा जा चुका है जिसकी प्रति नीचे दी जा रही है  l
 
 
 

Urgent letter to be delivered immediately to Sri Ahmad Hasan , Hon. Minister of your department

  
 
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urvashi sharma

<rtimahilamanchup@gmail.com>
AttachmentWed, Nov 27, 2013 at 2:11 PM
To: psecup.medical@nic.in
सेवा में,
श्री अहमद हसन
माननीय मंत्री - चिकित्सा स्वास्थ्यय एवं परिवार कल्याण
उत्तर प्रदेश शासन,लखनऊ-226001 , उत्तर प्रदेश , भारत
Phone office .- 2213263, 2236592    Fax:- 2238124, Res.- 2309427,
Mob.- 8005489027
द्वारा प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्यय  psecup.medical@nic.in

विषय : आप द्वारा  दिए गए सार्वजनिक  वक्तव्यों की सत्यता प्रमाणित करने
बाले प्रमाणों सहित दिनांक 28 नवम्बर  2013 दिन गुरूवार को उत्तर प्रदेश
राज्य सूचना आयोग में स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित
होकर उत्तर प्रदेश  सरकार के कैबिनेट मंत्री के सार्वजनिक  वक्तव्यों को
असत्य  होने से बचाने के सम्बन्ध में

महोदय,
कृपया बीते अप्रैल माह में  आप द्वारा उत्तर प्रदेश  सरकार के डॉक्टरों
के सम्बन्ध में  दिए गए सार्वजनिक  वक्तव्यों के सन्दर्भ से आपको अवगत
कराना है कि मातृत्व दिवस पर आयोजित एक कार्यशाला मेंआपने कहा था
"ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में तैनात 20 प्रतिशत डॉक्टर महकमे की छवि
धूमिल करने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ये स्थानीय माफिया से मिलकर
दादागीरी करते हैं। मरीजों को धमकाते हैं। कुल मिलाकर यह सब गुंडे हैं।
शहरी क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में तैनात 80 फीसद डॉक्टर बेहतर काम कर
रहे हैं। सामुदायिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टरों को
सुधारने की सारी कवायद फेल हो गई है। ये डॉक्टर मरीजों को ठीक से इलाज
मुहैया नहीं कराते हैं। ग्रामीण जब विरोध करते हैं तो डॉक्टर मरीज उनके
तीमारदारों को फर्जी मुकदमों में फंसा देते हैं। ऐसा सलूक करने वाले
डॉक्टरों की वजह से स्वास्थ्य महकमे की छवि धूमिल हो रही है।  "

इससे सम्बंधित समाचारों के प्रसार से मुझे  इसकी जानकारी होने पर  आपके
वक्तव्य सत्यता से परे प्रतीत हुए और मैंने मामले की तह तक जाने के लिए
बीते अप्रैल में  ही के चिकित्सा स्वास्थ्यय एवं परिवार कल्याण  उत्तर
प्रदेश शासन के जनसूचना अधिकारी से सूचना माँगी थी l जनसूचना अधिकारी
द्वारा सूचना दिए जाने पर मैंने विभाग में ही प्रथम अपील की और फिर भी
सूचना मिलने पर बीते जुलाई में उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में
द्वितीय अपील दायर की l

उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के सचिव ने इस सम्बन्ध में वाद संख्या
S-1/3455/C/2013 पंजीकृत किया है और पत्र संख्या 5739 दिनांक 20-11-13 (
प्रति संलग्न ) के माध्यम से मुझे नोटिस देकर आपके वक्तव्यों के सम्बन्ध
में प्रमाण सहित आख्या माँगी है और आप द्वारा बताये गए प्रतिशत का आधार
भी पूंछा है lक्योंकि आप द्वारा दिए गए वक्तव्यों को  प्रमाणित करने बाले
कोई भी प्रमाण शासन ने मुझे आज तक उपलब्ध नहीं कराये हैं तो ऐसे में आपके
बयानों के सम्बन्ध में मेरे पास तो कोई प्रमाण है और ही  आप द्वारा
बताये गए प्रतिशत का कोई आधार lऐसे  में आपसे अनुरोध है कि आप द्वारा
दिए गए सार्वजनिक  वक्तव्यों की सत्यता प्रमाणित करने बाले प्रमाणों सहित
उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि के माध्यम
से उपस्थित होकर उत्तर प्रदेश  सरकार के एक कैबिनेट मंत्री के सार्वजनिक
वक्तव्यों को असत्य  होने से बचाने का कष्ट करें अन्यथा उत्तर प्रदेश के
एक कैबिनेट मंत्री और आप   जैसे वरिष्ठ नेता के सार्वजनिक वयान असत्य
सिद्ध होने  पर उत्तर प्रदेश की छवि समस्त भू-मंडल में ख़राब हो जायेगी l

मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप ऐसा कभी नहीं चाहेंगे कि आपके द्वारा आपके
ही विभाग की कार्यप्रणाली के सम्बन्ध में दिए गए वक्तव्य असत्य सिद्ध हो
और उत्तर प्रदेश की छवि समस्त भू-मंडल में धूमिल हो अतः व्यापक लोकहित
में आपसे अपेक्षा है कि आप स्वयं द्वारा  दिए गए सार्वजनिक  वक्तव्यों की
सत्यता प्रमाणित करने बाले प्रमाणों सहित दिनांक 28 नवम्बर  2013 दिन
गुरूवार को उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि
के माध्यम से उपस्थित होने का कष्ट करेंगें l

अपेक्षाओं सहित सादर l
दिनांक : 27-11-2013
भवदीया

उर्वशी शर्मा
F-2286, राजाजीपुरम,लखनऊ- 226017
मोबाइल :9369613513 -मेल rtimahilamanchup@gmail.com
----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

वाद संख्या S-1/3455/C/2013 की दिनांक 28 नवम्बर 2013 दिन गुरूवार को होने बाली सुनवाई के रिकॉर्ड में लेने हेतु

  
 
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urvashi sharma

<rtimahilamanchup@gmail.com>
Thu, Nov 28, 2013 at 9:48 AM
To: "sec. sic" <sec.sic@up.nic.in>, "scic.up" <scic.up@up.nic.in>, "psecup.medical" <psecup.medical@nic.in>
सेवा में,
सचिव- उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग
इंदिरा भवन , लखनऊ-226001

विषय : वाद संख्या S-1/3455/C/2013 की दिनांक 28 नवम्बर  2013 दिन
गुरूवार को होने बाली सुनवाई के रिकॉर्ड में लेने हेतु

महोदय,
कृपया अवगत कराना है कि बीते अप्रैल में मातृत्व दिवस पर आयोजित एक
कार्यशाला में माननीय मंत्री श्री अहमद हसन ने  कहा था कि  ग्रामीण
क्षेत्र के अस्पतालों में तैनात 20 प्रतिशत डॉक्टर महकमे की छवि धूमिल
करने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ये स्थानीय माफिया से मिलकर दादागीरी
करते हैं। मरीजों को धमकाते हैं। कुल मिलाकर यह सब गुंडे हैं। शहरी
क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में तैनात 80 फीसद डॉक्टर बेहतर काम कर रहे
हैं। सामुदायिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टरों को सुधारने की
सारी कवायद फेल हो गई है। ये डॉक्टर मरीजों को ठीक से इलाज मुहैया नहीं
कराते हैं। ग्रामीण जब विरोध करते हैं तो डॉक्टर मरीज उनके तीमारदारों
को फर्जी मुकदमों में फंसा देते हैं। ऐसा सलूक करने वाले डॉक्टरों की वजह
से स्वास्थ्य महकमे की छवि धूमिल हो रही है आदि आदि   प्रमाण के रूप में
देश के सुस्थापित समाचार पत्रों के समाचारों की स्वसत्यपित प्रतियां
संलग्न हैं l

प्रकरण से  सम्बंधित समाचारों की जानकारी होने पर  मुझे श्री हसन के
वक्तव्य सत्यता से परे प्रतीत हुए और मैंने मामले की तह तक जाने के लिए
बीते अप्रैल में  ही  चिकित्सा स्वास्थ्यय एवं परिवार कल्याण  उत्तर
प्रदेश शासन के जनसूचना अधिकारी से सूचना माँगी थी l जनसूचना अधिकारी
द्वारा सूचना दिए जाने पर मैंने विभाग में ही प्रथम अपील की और फिर भी
सूचना मिलने पर बीते जुलाई में उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में
द्वितीय अपील दायर की l उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग  ने इस सम्बन्ध
में वाद संख्या  S-1/3455/C/2013 पंजीकृत किया है और पत्र संख्या 5739
दिनांक 20-11-13 के माध्यम से मुझे नोटिस देकर श्री हसन  के वक्तव्यों के
सम्बन्ध में प्रमाण सहित आख्या माँगी है और श्री हसन  द्वारा बताये गए
प्रतिशत का आधार भी पूंछा है lक्योंकि श्री हसन  द्वारा दिए गए वक्तव्यों
को  प्रमाणित करने बाले कोई भी प्रमाण शासन ने मुझे आज तक उपलब्ध नहीं
कराये हैं तो ऐसे में उनके  बयानों के सम्बन्ध में मेरे पास तो कोई
प्रमाण है और ही  उनके  द्वारा बताये गए प्रतिशत का कोई आधार lअतः
मैंने पत्र लिखकर श्री हसन से अपेक्षा की है कि वे उनके  द्वारा  दिए गए
सार्वजनिक  वक्तव्यों की सत्यता प्रमाणित करने बाले प्रमाणों सहित उत्तर
प्रदेश राज्य सूचना आयोग में स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि के माध्यम से
उपस्थित होकर उत्तर प्रदेश  सरकार के उन जैसे एक कैबिनेट मंत्री के
सार्वजनिक  वक्तव्यों को असत्य  होने से बचाने का कष्ट करें अन्यथा उत्तर
प्रदेश के एक कैबिनेट मंत्री और उन   जैसे वरिष्ठ नेता के सार्वजनिक वयान
असत्य सिद्ध होने  पर उत्तर प्रदेश की छवि समस्त भू-मंडल में ख़राब हो
जायेगी l

मुझे पूर्ण विश्वास है कि हसन  ऐसा कभी नहीं चाहेंगे कि उनके  द्वारा
उनके  ही विभाग की कार्यप्रणाली के सम्बन्ध में दिए गए वक्तव्य असत्य
सिद्ध हो और उत्तर प्रदेश की छवि समस्त भू-मंडल में धूमिल हो अतः मेरा
पूर्ण विश्वास  है कि व्यापक लोकहित में वे  स्वयं द्वारा  दिए गए
सार्वजनिक  वक्तव्यों की सत्यता प्रमाणित करने बाले प्रमाणों सहित दिनांक
28 नवम्बर  2013 दिन गुरूवार को उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में स्वयं
अथवा अपने प्रतिनिधि के माध्यम से अवश्य उपस्थित होंगे  l

सूचना आयोग का पत्र मुझे कल दिनांक 27 नवंबर 2013 को   मिला  l कल मैंने
मंत्री जी को सूचित करने हेतु पत्र लिखकर मैंने फैक्स के माध्यम से
प्रेषित करने का प्रयास किया पर फैक्स जा नहीं पाया और मैंने ये पत्र
मंत्री जी के विभाग के प्रमुख सचिव के माध्यम से मेल से भेजा है जिसकी
स्व सत्यापित प्रति संलग्न है l

यदि आज की सुनवाई में मंत्री जी नहीं आते हैं तो मेरा आयोग से अनुरोध है
कि माननीय मंत्री जी को नोटिस भेजकर आयोग के समक्ष बुलाकर उनका पक्ष
जानकार मुझे वांछित सूचना उपलब्ध कराईं जाएँ l

अपेक्षाओं सहित सादर l
दिनांक : 28-11-2013
भवदीया

( उर्वशी शर्मा )
F-2286, राजाजीपुरम,लखनऊ- 226017
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