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Friday, September 9, 2016

जावेद उस्मानी की महिला विरोधी कार्यशैली से महिलाओं के लिए अधिक असुरक्षित सूचना आयोग : उर्वशी

जावेद उस्मानी की महिला विरोधी कार्यशैली से महिलाओं के लिए अधिक असुरक्षित  सूचना आयोग : उर्वशी


To get details, please click below-given web-link http://upcpri.blogspot.in/2016/09/blog-post_72.html





लखनऊ/09 सितम्बर 2016/ यूपी के पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी पर महिला विरोधी होने के आरोप लग रहे हैं. उस्मानी पर यह आरोप उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन (निवारण,प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013 के तहत आतंरिक परिवाद समिति का गठन न किये जाने के कारण लग रहे हैं. इस बार उस्मानी पर यह गंभीर आरोप मौखिक रूप से नहीं लगाए गए हैं बल्कि लखनऊ स्थित वरिष्ठ सामाजिक कार्यकत्री और आरटीआई एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने जावेद उस्मानी को भेजे एक खुले ई-मेल के जरिये  उस्मानी पर यह आरोप बाकायदा लगाते हुए लिखित में उस्मानी और राज्य सूचना आयोग द्वारा महिला विरोधी मानसिकता के साथ काम करने के कारण इनकी भर्त्सना भी की है l उर्वशी का कहना है कि यूपी सीआइसी जावेद उस्मानी की महिला विरोधी कार्यशैली से यूपी का सूचना आयोग महिलाओं के लिए उत्तरोत्तर असुरक्षित होता जा रहा है.





सूचना आयोग में महिलाओं की असुरक्षा का जिक्र करते हुए उर्वशी ने लिखा है कि यूपी के सूचना आयुक्तों के हाथों उत्पीडित महिलाओं के अनेकों प्रार्थना पत्र सूचना आयोग में लंबित हैं और अनेकों महिलाएं आयोग में यौन उत्पीडन जांच समिति का गठन किये जाने का इंतज़ार कर रही हैं ताकि वे अपनी शिकायत इस समिति के समक्ष दर्ज कराकर न्याय पा सकें किन्तु  उनके द्वारा दायर की गयी याचिका पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ के स्पष्ट आदेश के बाद भी उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में विशाखा समिति  गठित न करने से जावेद उस्मानी और सूचना आयोग का महिला सम्मान रक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर निहायत गैर-जिम्मेदाराना रुख  सामने आया है l






उर्वशी ने एक विशेष बातचीत में बताया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश,महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन (निवारण,प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013 की व्यवस्था,उच्च न्यायालय के आदेश में यौन उत्पीडन जांच समिति गठित करने की स्पष्ट विधिक बाध्यता होने और उनके  द्वारा विगत 2 वर्षों से लगातार इस समिति के गठन की मांग किये जाने के बाद भी इस समिति का गठन न किये जाने से सिद्ध हो रहा है कि जावेद उस्मानी और उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग प्रशासन महिला उत्पीडन के दोषी सूचना आयुक्तों को बचाने के लिए महिला विरोधी मानसिकता के तहत कार्य कर रहे हैं l बकौल उर्वशी यूपी के सूचना आयोग और मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी द्वारा यौन उत्पीडन के आरोपी सूचना आयुक्तों को बचाने के लिए महिला विरोधी मानसिकता के साथ कार्य करने के कारण सूबे के युवा सीएम अखिलेश यादव की महिला सम्मान रक्षा की मुहिम के छवि भी धूमिल हो रही है l 










उर्वशी ने बताया कि उन्होंने अपने खुले ई-मेल को भारत के राष्ट्रपति,उप राष्ट्रपति,प्रधान मंत्री, उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश,यूपी के राज्यपाल,मुख्य मंत्री,इलाहाबाद उच्च नयायालय के मुख्य न्यायधीश समेत दर्जन भर अधिकारीयों को भेजते हुए यूपी के मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी और उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग प्रशासन द्वारा महिला विरोधी मानसिकता के तहत कार्य करने के कारण इनकी सार्वजनिक भर्त्सना की है और  आगाह किया है कि यदि अगले 1 माह के अन्दर यूपी के राज्य सूचना आयोग में लैंगिक उत्पीडन जांच समिति के गठन की सूचना उन्हें नहीं दी गयी तो वे इस मामले में उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में अवमानना याचिका दायर कर देंगी l





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Wednesday, September 7, 2016

महिला विरोधी हैं यूपी सीआइसी जावेद उस्मानी : उर्वशी शर्मा









लखनऊ/08 सितम्बर 2016/ यूपी के पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त पर महिला विरोधी होने के आरोप लग रहे हैं. उस्मानी पर यह आरोप उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन (निवारण,प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013 के तहत आतंरिक परिवाद समिति का गठन न किये जाने के कारण लग रहे हैं. इस बार उस्मानी पर यह गंभीर आरोप मौखिक रूप से नहीं लगाए गए हैं बल्कि लखनऊ स्थित वरिष्ठ सामाजिक कार्यकत्री और आरटीआई एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने जावेद उस्मानी को भेजे एक खुले ई-मेल के जरिये  उस्मानी पर यह आरोप बाकायदा लगाते हुए लिखित में उस्मानी और राज्य सूचना आयोग द्वारा महिला विरोधी मानसिकता के साथ काम करने के कारन इनकी भर्त्सना भी की है l  





सूचना आयोग में महिलाओं की असुरक्षा का जिक्र करते हुए उर्वशी ने लिखा है कि यूपी के सूचना आयुक्तों के हाथों उत्पीडित महिलाओं के अनेकों प्रार्थना पत्र सूचना आयोग में लंबित हैं और अनेकों महिलाएं आयोग में यौन उत्पीडन जांच समिति का गठन किये जाने का इंतज़ार कर रही हैं ताकि वे अपनी शिकायत इस समिति के समक्ष दर्ज कराकर न्याय पा सकें किन्तु  उनके द्वारा दायर की गयी याचिका पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ के स्पष्ट आदेश के बाद भी उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में विशाखा समिति  गठित न करने से जावेद उस्मानी और सूचना आयोग का महिला सम्मान रक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर निहायत गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाना सामने आया है l






उर्वशी ने एक विशेष बातचीत में बताया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश,महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन (निवारण,प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013 की व्यवस्था,उच्च न्यायालय के आदेश में यौन उत्पीडन जांच समिति गठित करने की स्पष्ट विधिक बाध्यता होने और उनके  द्वारा विगत 2 वर्षों से लगातार इस समिति के गठन की मांग किये जाने के बाद भी इस समिति का गठन न किये जाने से सिद्ध हो रहा है कि जावेद उस्मानी और उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग प्रशासन महिला उत्पीडन के दोषी सूचना आयुक्तों को बचाने के लिए महिला विरोधी मानसिकता के तहत कार्य कर रहे हैं l









उर्वशी ने बताया कि उन्होंने अपने खुले ई-मेल को भारत के राष्ट्रपति,उप राष्ट्रपति,प्रधान मंत्री, उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश,यूपी के राज्यपाल,मुख्य मंत्री,इलाहाबाद उच्च नयायालय के मुख्य न्यायधीश समेत दर्जन भर अधिकारीयों को भेजते हुए यूपी के मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी और उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग प्रशासन द्वारा महिला विरोधी मानसिकता के तहत कार्य करने के कारण इनकी सार्वजनिक भर्त्सना की है और  आगाह किया है कि यदि अगले 1 माह के अन्दर यूपी के राज्य सूचना आयोग में लैंगिक उत्पीडन जांच समिति के गठन की सूचना उन्हें नहीं दी गयी तो वे इस मामले में उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में अवमानना याचिका दायर कर देंगी l






राज्य सूचना आयोग के सचिव राघवेन्द्र विक्रम सिंह द्वारा उर्वशी को लिखे गए पत्र के 2 पेज की स्कैन्ड प्रति पाने के लिए यहाँ क्लिक करें   http://newsyaishwaryaj.blogspot.in/2016/09/l_7.html




टैग्स : महिला,विरोधी,यूपी,सीआइसी,जावेद,उस्मानी,उर्वशी,शर्मा,सूचना,आयोग   

Sunday, September 4, 2016

सुनवाई-कक्षों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं कराएगा यूपी सूचना आयोग.






पूर्ण विवरण पाने के लिए निम्नलिखित वेबलिंक पर क्लिक करें :




Lucknow/04 September 2016 ……….यूपी के समाजसेवियों द्वारा समाजसेविका उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में सूचना आयोग में पारदर्शिता स्थापित करने के लिए लम्बे समय से चलाई जा रही मुहिम को तगड़ा झटका देते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने अपने सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था कराने से साफ-साफ मना कर दिया है. आयोग ने यह निर्णय लखनऊ की समाजसेविका उर्वशी शर्मा द्वारा इस सम्बन्ध में उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ में दायर की गयी एक याचिका पर बीते 13 जुलाई को उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के साथ दिए गए प्रत्यावेदन का निस्तारण करते हुए दिया है.



  
बताते चलें कि सूचना आयोग में आने वाले आरटीआई प्रयोगकर्ताओं को सुनवाई कक्षों में सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने से रोकने के लिए सूचना आयुक्तों द्वारा असत्य आरोप लगाकर उनके साथ मारपीट करने और झूठे मामलों में फंसाकर पुलिस के हवाले कर जेल भिजवाने की घटनाओं की बढ़ती संख्याओं के मद्देनज़र यूपी के समाजसेवी लखनऊ की वरिष्ठ आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में लम्बे समय से उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के  सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था कराने की मुहिम चला रहे हैं.


इस मुहिम के अंतर्गत उर्वशी शर्मा की अगुआई में सूचना आयुक्तों का पुतला दहन, सूचना आयोग में कार्य वहिष्कार और सूचना आयोग के उद्घाटन के दिन उपराष्ट्रपति के विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम भी आयोजित किये जा चुके हैं. लखनऊ पुलिस ने इस मामले में उर्वशी के साथ आरटीआई कार्यकर्त्ता तनवीर अहमद सिद्दीकी को उपराष्ट्रपति के आगमन से 1 दिन पहले पुलिस हिरासत में ले लिया  था और उपराष्ट्रपति के जाने के बाद ही रिहा किया था.
  

समाजसेविका उर्वशी ने एक विशेष बातचीत में बताया कि उनकी इस मांग को मानते हुए पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त रणजीत सिंह पंकज ने इंदिरा भवन परिसर में सूचना आयुक्तों के सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था कराई थी किन्तु पंकज की सेवानिवृत्ति के बाद  सूचना आयुक्तों ने कैमरों को हटवा दिया और वर्तमान मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने कार्यभार सँभालने के बाद  ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था के अवशेष चिन्ह भी मिटा दिए . उर्वशी कहती हैं कि सूचना आयोग के सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था कराने के लिए उन्होंने देश और प्रदेश के संवैधानिक पदों पर आसीन सभी पदाधिकारियों को पत्र लिखे  और  धरना प्रदर्शन किया और जब इससे भी सूचना आयोग के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगी तो विवश होकर उन्होंने बीते जुलाई महीने में उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ में एक याचिका दायर करके के सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था कराने के लिए गुहार लगाई थी.उर्वशी ने बताया कि उच्च न्यायालय ने बीते जुलाई की 13 तारीख की सुनवाई में उनसे कहा था कि वे न्यायालय के आदेश, जिसमें उच्च न्यायालय ने माना था कि आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता के लिए आयोग के सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था आवश्यक है, के साथ अपना मांगपत्र सूचना आयोग को दें. बकौल उर्वशी उन्होंने बीते 16 जुलाई और 21 जुलाई के दो पत्रों के माध्यम से हाई कोर्ट का आदेश आयोग को देते हुए आयोग के सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था कराने की माग दोहराई थी जिस पर कार्यवाही करते हुए आयोग के सचिव राघवेन्द्र विक्रम सिंह ने बीते 19 अगस्त को उर्वशी को एक पत्र जारी करते हुए बताया है कि क्योंकि प्रदेश के शीर्ष न्यायिक संस्थान, उच्च न्यायालय,मानवाधिकार आयोग,उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिकरण,महिला आयोग,पिछड़ा वर्ग आयोग,उपभोक्ता फोरम,जनपद न्यायालयों, केन्द्रीय सूचना आयोग में में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था नहीं कराई गयी है अतः सूचना आयोग में भी ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था करने की आवश्यकता व औचित्य नहीं पाया गया है.


हाई कोर्ट के आदेश के बाबजूद सूचना आयोग में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था बहाल करने से मना करने के सूचना आयोग के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उर्वशी ने इसे आयोग का पारदर्शिता विरोधी कदम बताया और कहा कि यूपी के भ्रष्ट और अयोग्य सूचना आयुक्त अपने भ्रष्टाचार और अयोग्यता के साक्ष्य सार्वजनिक होने के डर से ही सुनवाई कक्षों में सुनवाइयों की पारदर्शी व्यवस्था स्थापित होने का विरोध कर रहे है.उर्वशी ने सूचना आयोग के इस रवैये पर कडा ऐतराज जताते हुए इस मामले में उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करने की बात कही है.


  

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी द्वारा सूचना आयोग में सुनवाइयों की पारदर्शी व्यवस्था स्थापित कराने के मार्ग में रोड़ा अटकाने को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए उर्वशी ने जावेद उस्मानी को पारदर्शिता विरोधी मानसिकता का अधिकारी बताया और जावेद उस्मानी को सीएम अखिलेश यादव की पारदर्शिता संवर्धन की मुहिम के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा बताया है.

  
To download letter written by Uttar Pradesh State Information Commission  to Lucknow Activist Urvashi Sharma, Please click this we-blink  http://newsyaishwaryaj.blogspot.in/2016/09/no-audio-video-recording-in-up.html



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